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​आत्म-नियंत्रण और मेडिटेशन ही आज के युवाओं की सबसे बड़ी अंतःशक्ति: प्रो. मनोज दयाल ​

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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTUJM), रायपुर तथा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “आत्म-नियंत्रण से अंतःशक्ति का जागरण” विषय पर एक दिवसीय प्रेरणादायी कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को मेडिटेशन, सकारात्मक चिंतन, मानसिक संतुलन और व्यक्तित्व विकास का संदेश दिया गया।

​21वीं सदी के युवाओं के लिए आत्म-नियंत्रण ही जीवन का मूल मंत्र

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि आज तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया की इस दुनिया में सूचनाओं की भरमार है, लेकिन इसके साथ ही युवाओं में तुलना, चिंता और मानसिक अशांति भी बढ़ रही है।

​ पत्रकारिता शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और कौशल देना नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और मानवीय मूल्यों का रोपण करना है। भविष्य के मीडिया कर्मियों के सामने टीआरपी की अंधी दौड़, फेक न्यूज, नकारात्मकता और अहंकार जैसी चार बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने का एकमात्र रास्ता आत्म-नियंत्रण और आंतरिक शक्ति का जागरण है।
​उन्होंने ब्रह्माकुमारीज द्वारा बताए गए तीन सरल सूत्रों संकल्पों पर नियंत्रण, वाणी पर नियंत्रण तथा समय और आदतों पर नियंत्रण—को जीवन में उतारने और नियमित मेडिटेशन अपनाने का आह्वान किया।

​अपेक्षाएं ही क्रोध का मुख्य कारण: ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी

​इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी ने कहा कि क्रोध का सबसे बड़ा कारण दूसरों से अत्यधिक अपेक्षाएं रखना है। यदि हम हर परिस्थिति में स्वयं से पूछें कि ‘क्रोध से मुझे क्या मिलेगा?’, तो मन तुरंत शांत होने लगता है। उन्होंने अवचेतन मन को सशक्त बनाने के लिए रोजाना “मैं शांतचित्त आत्मा हूँ”, “मैं शक्तिशाली हूँ” और “मैं सफलता का सितारा हूँ” जैसे सकारात्मक विचारों के अभ्यास पर बल दिया। वर्तमान दौर की भागदौड़ में मेडिटेशन युवाओं को तनावमुक्त रखने और धैर्य देने का काम करता है।
​कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि मेडिटेशन मानसिक शांति के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

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