यादव समाज मुंगेली के तत्वाधान में धूमधाम से किया गया भोजली विसर्जन
*बड़ा बाजार मुंगेली से निकल कर नगर भ्रमण करते हुए आगर नदी में किया गया विसर्जन*
*संदीप यादव, मुंगेली।* यादव समाज मुंगेली के तत्वाधान में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी भोजली पर्व धूमधाम से मनाया गया। बड़ा बाजार मुंगेली से शोभायात्रा निकल कर नगर भ्रमण करते हुए आगर नदी में भोजली का विसर्जन किया गया।
भोजली छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा लोक पर्व है, जो सिर्फ त्यौहार नहीं, बल्कि किसानी और दोस्ती का कैलेंडर है।
*1. भोजली है क्या वैज्ञानिक रूप से?*
गेहूं के बीज को अंधेरे में उगाना। अंधेरे में उगने से इसमें क्लोरोफिल नहीं बनता, इसलिए ये पीले-सफेद रंग की रहती है, जिसे छत्तीसगढ़ी में ‘भोजली’ कहते हैं। ये आने वाले रबी सीजन की समृद्धि का टोटका है।
*2. पूरा क्रम कैसे होता है – मुंगेली में कैसे मनाते हैं*
*दिन 1 – बोवाई (हरियाली अमावस्या):* मिट्टी की छोटी टोकरी को ‘भोजली खोली’ कहते हैं। उसमें मिट्टी + गोबर खाद मिलाकर गेहूं बोया जाता है। अब तो लोग जौ भी बोते हैं। इसे घर के देवस्थान / अंधेरी कोठरी में रखा जाता है।
*8 दिन तक सेवा:* रोज सुबह नहा-धोकर महिलाएं इसमें पानी छिड़कती हैं और गीत गाती हैं – “भोजली भोजली थर-थर कांपे, मोर भोजली…” इस दौरान भोजली को किसी बाहरी व्यक्ति को दिखाना अशुभ मानते हैं।
*आखिरी दिन – रक्षाबंधन के दूसरे दिन शाम (भोजली बदला):* शाम को टोकरी से भोजली निकाली जाती है। पूरा गांव, मोहल्ला एक जगह इकट्ठा होता है। एक-दूसरे के कान के ऊपर भोजली खोंचते हैं। मंत्र बोलते हैं: “भोजली लेव-लेव, गंगा जल ले, चिरंजीव रहो”
*3. असली मतलब – 3 चीजों का संगम*
*a) कृषि:* ये बीज परीक्षण है। अगर भोजली अच्छी, घनी और लंबी उगी तो माना जाता है इस साल फसल बहुत अच्छी होगी।
*b) दोस्ती:* इसे ‘मितान-बदला’ भी कहते हैं। जिनसे भोजली बदली, वो जीवन भर के भोजली-मितान बन गए। जात-पात से ऊपर उठकर दोस्ती का सबसे बड़ा त्यौहार।
*c)* एक दूसरे के कान पर भोजली लगाकर उसकी लंबी उम्र मांगते हैं, और उम्र भर के लिए एक दूसरे के लिए खास मित्र (मितान) बनने का वादा करते हैं।

*मुंगेली-बिलासपुर की खास बात -* मुंगेली में रक्षाबंधन के 2 दिन पहले भोजली बाजार लगता है। लोरमी, पथरिया, जरहागांव से लोग भोजली बेचने आते हैं। एक टोकरी 20-50 रुपये में बिकती है।
इस अवसर पर सीरिया यादव ने कहा कि भोजली छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े लोक पर्वों में से एक है, जो सिर्फ त्यौहार नहीं, बल्कि किसानी और दोस्ती का पर्व है। यह सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि यह छत्तीसगढ़ परंपरा की पहचान है, इसे संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।



