मुंगेली : कहानी बदलाव की: मत्स्य पालन से स्वरोजगार की नई राह, सूर्यकान्त गेंदले बने आत्मनिर्भरता की मिसाल
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिला संबल, 25 डिसमिल के तालाब में 09 से 10 टन मछली उत्पादन कर अर्जित की आय
मुंगेली, 16 सितंबर 2026
जिले के विकासखण्ड पथरिया अंतर्गत ग्राम डॉडगांव निवासी श्री सूर्यकान्त गेदले ने अपनी रुचि और मेहनत को स्वरोजगार में बदलते हुए मत्स्य पालन के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिले मार्गदर्शन और अनुदान के सहयोग से उन्होंने आधुनिक तकनीक अपनाकर मत्स्य पालन को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया है। मत्स्य पालन के प्रति रुचि रखने वाले सूर्यकान्त गेंदले ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने के उद्देश्य से सहायक संचालक मत्स्योद्योग, जिला मुंगेली से संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त की। विभाग द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत पॉन्ड लाइनर तालाब निर्माण के संबंध में जानकारी दी गई। योजना के तहत लगभग 14 लाख रुपये की परियोजना लागत पर पात्रतानुसार अनुसूचित जाति वर्ग के हितग्राही को 60 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान बताया गया।
योजना का लाभ उठाते हुए सूर्यकान्त ने विभागीय मानकों के अनुरूप 0.100 हेक्टेयर यानी 25 डिसमिल क्षेत्र में पॉन्ड लाइनर तालाब का निर्माण कराया। इसके बाद तालाब में पंगेशियस प्रजाति के लगभग 11 हजार मछली बीज का संचयन किया गया। मत्स्य पालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से संचालित करने के लिए उन्होंने एरेशन सिस्टम, पानी की जांच किट, तापमान मापक यंत्र, फिश मेडिसिन तथा उच्च गुणवत्ता वाले फिश फीड की व्यवस्था की। सूर्यकान्त गेंदले ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति एवं आधुनिक तकनीक अपनाने से उन्हें महज 08 से 09 माह में लगभग 09 से 10 टन मछली उत्पादन प्राप्त हुआ। इस व्यवसाय से उन्हें लगभग 9 लाख रुपये की कुल आय हुई, जबकि लगभग 04 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ। मत्स्य पालन से उन्हें वार्षिक स्तर पर लगभग 04 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
मत्स्य पालन ने न केवल सूर्यकान्त गेंदले की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया, बल्कि उनके माध्यम से 04 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है। बेरोजगारी से स्वरोजगार की ओर बढ़ते हुए उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और गांव में भी रोजगार का अवसर सृजित किया है। सूर्यकान्त गेदले की सफलता यह दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं का उचित लाभ, विभागीय मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और मेहनत के साथ मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है। हितग्राही ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना उनके लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनी।



