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गणित को रटने का नहीं, समझने और आनंद लेने का विषय बनाने पर जोर

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रायपुर : गणित को रटने का नहीं, समझने और आनंद लेने का विषय बनाने पर जोर

 

 

 

 

 

गणित तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम

रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

रायपुर, 23 सितंबर 2026

 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रूचि, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर द्वारा गणित शिक्षण को सरल, रूचिकर, गतिविधि-आधारित एवं रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से 22 एवं 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के नेतृत्व में किया गया।

 

कार्यक्रम के प्रथम दिवस 22 सितंबर को रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान एवं गणित विषय के लगभग 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की। रायपुर जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों तथा दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया गया। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन 23 सितंबर को बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें एससीईआरटी के बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बी.एड. विद्यार्थी तथा आईटीईपी के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, गतिविधि-आधारित एवं व्यावहारिक पद्धतियों से परिचित कराना रहा, ताकि वे भविष्य में कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी एवं आनंददायक तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय न बनाकर सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए भावी शिक्षकों को कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच श्री बी. एन. राव ने प्रशिक्षण के दोनों दिवसों पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए गणित शिक्षण की नवीन एवं गतिविधि-आधारित विधियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, गणितीय खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार गणितीय अवधारणाओं को सरल और आनंददायक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल उत्तर बताने के बजाय स्वयं सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया।

सत्र के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से वर्तमान शिक्षकों के साथ-साथ भावी शिक्षकों को भी गणित शिक्षण की नवीन पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की टीम, संबंधित अधिकारियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।