THEBHARAT24: रतनपुर के मातृका नर्सिंग होम में महिला की संदिग्ध मौत का मामला, चार डॉक्टरों ने 85 मिनट तक किया पोस्टमार्टम, फिर भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं; FSL रिपोर्ट का इंतजार
सरकारी डॉक्टर पर निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का आरोप, पीएम रिपोर्ट में सर्जरी और एनेस्थीसिया के साक्ष्य; मृतका के बेटे ने एसपी से की शिकायत, पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
CG News:- सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर के निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक मां की मौत ने परिवार को ऐसे सवालों के बीच छोड़ दिया है, जिनका जवाब अभी बाकी है। परिजनों के अनुसार 50 वर्षीय कुमारी बाई साहू 6 जून को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए मातृका नर्सिंग होम पहुंची थीं। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी हालत बिगड़ी और ब्लड प्रेशर लो होने की बात कहकर उन्हें सिम्स भेजा गया, जहां उन्हें पहले से मृत बताया गया। 7 जून को सिम्स की चार सदस्यीय टीम ने 85 मिनट तक पोस्टमार्टम किया, जिसमें सर्जिकल और एनेस्थेटिक हस्तक्षेप के साक्ष्य मिले, लेकिन मौत का कारण FSL और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट तक लंबित रखा गया। मृतका के बेटे ने आरोप लगाया है कि उनकी मां की मौत मातृका नर्सिंग होम में ही हो चुकी थी और सरकारी सेवा में पदस्थ डॉक्टर की निजी अस्पताल में भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एक परिवार अपनी मां को खो चुका है, लेकिन आज भी उसके सामने यही सवाल है—जिस अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर मां गई थी, वहीं से उसकी जिंदगी की आखिरी खबर क्यों आई? और अगर सरकारी सेवा में पदस्थ डॉक्टर निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर रहे थे, तो इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसकी थी?
बिलासपुर/रतनपुर। रतनपुर के मातृका नर्सिंग होम में बच्चेदानी के ऑपरेशन के दौरान 50 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पर आकर टिक गया है। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के चार विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक घंटा 25 मिनट तक शव का परीक्षण किया, लेकिन मृत्यु का निश्चित कारण स्पष्ट नहीं हो सका। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्जिकल और एनेस्थेटिक हस्तक्षेप के साक्ष्य मिलने का उल्लेख है। इसके बावजूद चिकित्सकीय टीम ने मृत्यु का कारण विसरा की फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट प्राप्त होने तक लंबित रखा है।
इधर, मृतका के परिजनों ने रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सरकारी डॉक्टर पर निजी अस्पताल में ऑपरेशन और इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि महिला की मौत मातृका नर्सिंग होम में ही हो गई थी, लेकिन बाद में उसे बिलासपुर सिम्स भेज दिया गया। मामले में पुलिस द्वारा अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत भी पुलिस अधीक्षक से की गई है।
चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, 85 मिनट का पोस्टमार्टम और मौत का कारण अब भी लंबित
मामला बिलासपुर जिले के रतनपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवागांव, मोहदा निवासी 50 वर्षीय कुमारी बाई साहू, पति ईश्वर साहू की मृत्यु से जुड़ा है। महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद पोस्टमार्टम के लिए चार सदस्यीय चिकित्सकीय टीम गठित की गई।
इस टीम में सिम्स बिलासपुर के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग, फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग, पैथोलॉजी विभाग तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक शामिल थे।
शव परीक्षा प्रतिवेदन के मुताबिक 7 जून 2026 को दोपहर 1 बजकर 5 मिनट पर पोस्टमार्टम शुरू हुआ, जो दोपहर 2 बजकर 30 मिनट तक चला।
इस तरह चार डॉक्टरों की टीम ने करीब 85 मिनट तक शव का परीक्षण किया। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का निश्चित कारण नहीं बताया गया है।
चिकित्सकों ने मृत्यु का कारण स्पष्ट करने के लिए विसरा की FSL जांच और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले ऑपरेशन और बेहोशी संबंधी हस्तक्षेप के साक्ष्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के शरीर पर मिले चिकित्सकीय उपकरणों और अन्य परिस्थितियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
बाहरी परीक्षण के दौरान शव सफेद चादर पर पीठ के बल रखा हुआ था। मृतका ने गहरे नीले रंग का अस्पताल का गाउन पहन रखा था। चेहरा काले रंग के स्कार्फ से ढका हुआ था। दोनों कलाइयों में लाल रंग की एक-एक चूड़ी और नाक के बाईं ओर सुनहरे रंग की लौंग मौजूद थी।
रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के मुंह के दाहिने कोने में एंडोट्रेकियल ट्यूब लगी हुई थी। यह नली मरीज को सांस देने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
शरीर में फोली कैथेटर भी लगा हुआ था, जिसके यूरोबैग में लगभग 300 मिलीलीटर पेशाब मौजूद था। बाईं कलाई पर गुलाबी रंग का कैनुला लगा मिला।
पोस्टमार्टम के दौरान योनि मार्ग के भीतर आधा खून से सना हुआ गॉज पीस भी पाया गया।
चिकित्सकों ने इन सभी तथ्यों का उल्लेख शव परीक्षा प्रतिवेदन में किया है।
रिपोर्ट में मृतका पर सर्जिकल और एनेस्थेटिक हस्तक्षेप के साक्ष्य मिलने की बात दर्ज है। हालांकि केवल इन साक्ष्यों के आधार पर चिकित्सकीय लापरवाही या मृत्यु का कारण निर्धारित नहीं किया गया है।
शरीर में अकड़न, आंतरिक अंगों में रक्त जमाव का उल्लेख
शव परीक्षण में मृतका की आंखें बंद पाई गईं। कॉर्निया धुंधला था। मुंह आधा खुला हुआ था, जीभ भीतर थी और होंठ अलग थे। दोनों हाथ-पैर सीधे थे।
पूरे शरीर में रिगर मॉर्टिस अर्थात मृत्यु के बाद होने वाली अकड़न मौजूद थी। शरीर के निचले हिस्सों में हाइपोस्टैसिस यानी मृत्यु के बाद रक्त का जमाव स्थिर हो चुका था।
आंतरिक परीक्षण में छोटी और बड़ी आंत में मल तथा गैस मौजूद होने का उल्लेख है।
यकृत (लिवर), प्लीहा और गुर्दे कंजेस्टेड पाए गए। चिकित्सकीय भाषा में कंजेशन का अर्थ संबंधित अंगों में रक्त की अधिकता या जमाव की स्थिति से है।
हालांकि इन निष्कर्षों के बावजूद चिकित्सकों ने मृत्यु का निश्चित कारण नहीं बताया है।
पोस्टमार्टम से 24 घंटे के भीतर हुई थी मौत, लेकिन कब और कहां?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का समय शव परीक्षण से 24 घंटे के भीतर बताया गया है।
इसी तथ्य को आधार बनाकर मृतका के पुत्र मुकेश साहू ने अस्पताल में ही मौत होने की आशंका जताई है।
मुकेश का कहना है कि उनकी मां का पोस्टमार्टम 7 जून को दोपहर लगभग 1 बजे शुरू हुआ था। रिपोर्ट में मृत्यु 24 घंटे के भीतर होने का उल्लेख है। उनका आरोप है कि उनकी मां की मृत्यु 6 जून को मातृका नर्सिंग होम में ही हो चुकी थी।
हालांकि पोस्टमार्टम से 24 घंटे के भीतर मृत्यु होने का उल्लेख अपने आप में मौत का सटीक समय या स्थान प्रमाणित नहीं करता। इसके लिए अस्पताल के उपचार संबंधी दस्तावेज, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
38 हजार रुपये में तय हुआ था बच्चेदानी का ऑपरेशन, 15 हजार जमा कराए
मृतका के पुत्र मुकेश साहू ने 21 जुलाई 2026 को बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायत पत्र में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया है।
शिकायत के मुताबिक उनकी मां कुमारी बाई साहू की बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने के लिए मातृका नर्सिंग होम में 38 हजार रुपये में इलाज तय हुआ था।
इसमें से 15 हजार रुपये अस्पताल में जमा कराए गए थे।
मुकेश के अनुसार, 6 जून 2026 को सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच उनकी मां को मातृका नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।
दोपहर करीब 2:30 बजे उपस्थित डॉ. नेहुल झा उनकी मां को ऑपरेशन थियेटर लेकर गए।
इसके बाद शाम करीब 4 बजे डॉक्टर ने परिजनों को महिला का ब्लड प्रेशर कम होने की जानकारी दी।
शिकायत के अनुसार, डॉक्टर ने महिला को बिलासपुर सिम्स ले जाकर आईसीयू में भर्ती कराने की सलाह दी।
मातृका नर्सिंग होम में ही हो गई थी मौत? बेटे ने लगाए गंभीर आरोप
मुकेश साहू का आरोप है कि उनकी मां की मृत्यु मातृका नर्सिंग होम में ही हो चुकी थी।
उनके मुताबिक अस्पताल की एम्बुलेंस में अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा महिला को सिम्स बिलासपुर ले जाया गया।
मुकेश ने शिकायत में दावा किया है कि सिम्स पहुंचने पर वहां मौजूद डॉक्टरों ने उनकी मां को पहले से मृत बताया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन और इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके कारण महिला की मृत्यु हुई।
इस घटनाक्रम ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
यदि महिला का ब्लड प्रेशर कम हुआ था तो उस समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी? ऑपरेशन के दौरान कौन-कौन सी दवाएं दी गई थीं? मरीज को सिम्स रेफर करते समय उसकी स्थिति क्या दर्ज की गई थी? और सिम्स पहुंचने पर डॉक्टरों ने क्या निष्कर्ष दर्ज किया?
इन सवालों का जवाब संबंधित अस्पतालों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड और जांच से ही मिल सकेगा।
सीएचसी में सरकारी डॉक्टर, निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने का आरोप
मृतका के पुत्र ने अपनी शिकायत में रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. नेहुल झा पर भी आरोप लगाए हैं।
शिकायत में बताया गया है कि रतनपुर पुलिस थाने के सामने वार्ड क्रमांक 02, गांधीनगर में मातृका नर्सिंग होम संचालित है। इसके संचालक आर.के. झा बताए गए हैं।
मुकेश का आरोप है कि डॉ. नेहुल झा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर में पदस्थ होने के साथ मातृका नर्सिंग होम में भी मरीजों का उपचार करती हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर बीमारियों से पीड़ित होकर पहुंचने वाले मरीजों का इलाज निजी अस्पताल में किया जाता है।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए सरकारी डॉक्टर की निजी अस्पताल में भूमिका, संबंधित अनुमति और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
6 जून को पुलिस को दी सूचना, 21 जुलाई को एसपी से शिकायत
मुकेश साहू के अनुसार, उनकी मां की मृत्यु के संबंध में 6 जून 2026 को ही रतनपुर थाने में सूचना दी गई थी।
इसके बावजूद अस्पताल संचालक, संबंधित डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
इसके बाद मुकेश ने 21 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक, जिला बिलासपुर को लिखित शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत में मातृका नर्सिंग होम के संचालक आर.के. झा, डॉ. नेहुल झा और अन्य स्टाफ के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक ऑपरेशन तथा उपचार करने से मृत्यु होने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
परिजनों ने पुलिस पर गैर इरादतन हत्या का अपराध दर्ज करने में आनाकानी करने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से अब तक की गई जांच और कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।
FSL और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट से क्या होगा स्पष्ट?
इस मामले में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने मृत्यु का कारण स्पष्ट करने के लिए दो महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट लंबित रखी हैं।
विसरा की FSL रिपोर्ट: इसमें सुरक्षित किए गए आंतरिक अंगों और अन्य नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है। इससे विषाक्त पदार्थों या अन्य रासायनिक तत्वों की मौजूदगी से संबंधित जानकारी मिल सकती है।
हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट: इसमें शरीर के ऊतकों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाता है। इससे अंगों में बीमारी, चोट या अन्य रोग संबंधी परिवर्तनों की जानकारी मिल सकती है।
दोनों रिपोर्टों के निष्कर्षों को पोस्टमार्टम और उपचार संबंधी रिकॉर्ड के साथ मिलाकर मृत्यु का कारण निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।
अब जांच के सामने कई सवाल
मातृका नर्सिंग होम में हुई इस संदिग्ध मौत के मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर ऑपरेशन के दौरान ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि महिला को सिम्स रेफर करना पड़ा?
क्या ऑपरेशन से पहले आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किए गए थे? क्या एनेस्थीसिया देने के दौरान कोई जटिलता उत्पन्न हुई थी? ब्लड प्रेशर कम होने के बाद मरीज को कौन-सा उपचार दिया गया? अस्पताल से रेफर करते समय महिला की वास्तविक स्थिति क्या थी?
इसके साथ ही सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की निजी नर्सिंग होम में भूमिका और वहां उपलब्ध ऑपरेशन संबंधी सुविधाओं की जांच भी परिजनों की शिकायत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्जरी और एनेस्थीसिया संबंधी हस्तक्षेप के साक्ष्य दर्ज हैं, लेकिन मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है। चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं, इसका निष्कर्ष भी उपलब्ध पोस्टमार्टम विवरण के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
अब विसरा FSL रिपोर्ट, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट, अस्पताल के उपचार संबंधी दस्तावेज और पुलिस जांच के निष्कर्ष ही इस मामले की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट कर सकेंगे।
मामले में मातृका नर्सिंग होम प्रबंधन, डॉ. नेहुल झा और रतनपुर पुलिस का पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनके पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


