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विशेष लेख: सेवा संकल्प अभियान:ग्राम सभाओं से गांवों के विकास को नई दिशा

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धमतरी : विशेष लेख: सेवा संकल्प अभियान:ग्राम सभाओं से गांवों के विकास को नई दिशा

 

 

 

 

 

रिफॉर्म उत्सव: अधिकार, रोजगार और आजीविका पर जोर

 

शशि रत्न पाराशर, उप संचालक

 

धमतरी, 30 सितंबर 2026

 

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत गांव का विकास केवल योजनाओं और बजट से नहीं, बल्कि उस विकास में गांव के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से आकार लेता है। ग्राम सभा इसी जनभागीदारी की वह संवैधानिक और लोकतांत्रिक आधारशिला है, जहां ग्रामीण अपने गांव की जरूरतों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा पर सामूहिक रूप से विचार करते हैं। इसी भावना को और मजबूत करते हुए 2 अक्टूबर 2026 से जन योजना अभियान (पीपल्स प्लान कैंपेन-पीपीसी) के साथ एकीकृत रिफॉर्म उत्सव का शुभारंभ किया जा रहा है। धमतरी जिले की ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली ग्राम सभाएं इस अभियान के माध्यम से रोजगार, आजीविका, ग्रामीण अधोसंरचना और सामाजिक जवाबदेही से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बनेंगी।

रिफॉर्म उत्सव में विशेष रूप से विकसित भारत–जी राम जी योजना तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित लखपति दीदी योजना को केंद्र में रखा गया है। इसका उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके अधिकारों, उपलब्ध अवसरों और ग्राम विकास में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना है।

 

100 से बढ़कर 125 दिन—रोजगार सुरक्षा का विस्तार

विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों द्वारा अकुशल श्रम करने की इच्छा व्यक्त करने पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी का प्रावधान है। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हुई है।

रोजगार की यह बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण परिवारों की आय-सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। रिफॉर्म उत्सव के दौरान ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को सरल भाषा में बताया जाएगा कि रोजगार की मांग कैसे की जा सकती है, किस स्तर पर आवेदन किया जा सकता है और योजना के तहत उपलब्ध अधिकार क्या हैं।

काम की मांग पर 15 दिनों के भीतर रोजगार

योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान रोजगार की मांग से जुड़ा है। रोजगार के लिए आवेदन करने के बाद 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाना है। निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर पात्र श्रमिक को नियमानुसार बेरोजगारी भत्ते का अधिकार होगा।

ग्राम सभाओं में इस प्रावधान को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण परिवार रोजगार की आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपनी मांग दर्ज करा सकें और अपने वैधानिक अधिकारों से परिचित हों।

मेहनत का सम्मान—समय पर मजदूरी भुगतान पर जोर

ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार तभी सार्थक है, जब उनकी मेहनत का पारिश्रमिक समय पर मिले। योजना में मजदूरी भुगतान के लिए समयबद्ध व्यवस्था का प्रावधान है। मजदूरी का भुगतान सामान्यतः साप्ताहिक आधार पर और किसी भी स्थिति में मस्टर रोल बंद होने के बाद अधिकतम एक पखवाड़े के भीतर किया जाना है। निर्धारित अवधि से अधिक विलंब होने पर श्रमिकों को नियमानुसार विलंब क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।

इससे ग्राम सभाओं में केवल रोजगार उपलब्ध कराने की चर्चा नहीं होगी, बल्कि रोजगार से मजदूरी और मजदूरी से श्रमिक के अधिकार तक पूरी प्रक्रिया को समझाने पर जोर रहेगा।

रोजगार के साथ गांव की स्थायी संपत्तियों का निर्माण

विकसित भारत–जी राम जी योजना का दृष्टिकोण केवल मजदूरी रोजगार तक सीमित नहीं है। रोजगार सृजन को ऐसे कार्यों से जोड़ा गया है, जिनसे गांव की दीर्घकालिक जरूरतें पूरी हों और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण हो। योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका आधारित अधोसंरचना तथा चरम मौसम की परिस्थितियों से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

इसका सीधा अर्थ है कि आज का श्रम कल के गांव की संपत्ति बन सकता है। जल संरक्षण संरचनाएं, कृषि एवं आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियां, ग्रामीण संपर्क और अन्य उपयोगी अधोसंरचनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकती हैं।

ग्राम सभा से निकलेगी गांव के विकास की कार्ययोजना

इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम सभा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। स्थानीय जरूरतों को समझने और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाने पर जोर दिया गया है। विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण के लिए विकसित ग्राम पंचायत प्लान की अवधारणा के माध्यम से स्थानीय समुदाय की सहभागिता को महत्व दिया गया है।

धमतरी जिले में आयोजित ग्राम सभाओं में ग्रामीणों से यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि उनके गांव में सबसे पहले किस कार्य की आवश्यकता है—कहां जल संरक्षण जरूरी है, किस क्षेत्र में आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है, किस अधोसंरचना की आवश्यकता है और किन कार्यों से अधिक से अधिक परिवारों को लाभ मिल सकता है।

इस तरह ग्राम सभा केवल योजनाओं की जानकारी देने का मंच नहीं, बल्कि गांव के भविष्य की प्राथमिकताएं तय करने का सहभागी मंच बनेगी।

पारदर्शिता, तकनीक और सामाजिक अंकेक्षण से जवाबदेही

योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी महत्व दिया गया है। डिजिटल प्रणालियों, तकनीक आधारित निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण जैसे उपायों के माध्यम से कार्यों की निगरानी तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने का प्रावधान है।

सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से ग्राम सभा योजनाओं के क्रियान्वयन, कार्यों की गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग की समीक्षा में सहभागी बन सकती है। इससे विकास कार्यों के प्रति सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही की भावना मजबूत होगी।

लखपति दीदी—आजीविका से आत्मनिर्भरता की ओर

रिफॉर्म उत्सव का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लखपति दीदी योजना है। ग्राम सभाओं में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका गतिविधियों, स्वरोजगार, आयवर्धन और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़े अवसरों की जानकारी दी जाएगी।

महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देकर गांव की अर्थव्यवस्था को परिवार की आय से आगे सामुदायिक समृद्धि के व्यापक आधार से जोड़ा जा सकता है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों, प्रसंस्करण, पशुपालन, लघु उद्यम और अन्य स्थानीय आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आर्थिक भूमिका को और सशक्त कर सकती हैं।

सीईओ जिला पंचायत ने दिए प्रभावी जनभागीदारी के निर्देश

सीईओ जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रिफॉर्म उत्सव की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य योजनाओं की जानकारी को केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सरल और सहज भाषा में पहुंचाना है।

उन्होंने ग्राम सभाओं में पंचायत प्रतिनिधियों, श्रमिकों, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं और अन्य ग्रामीणों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को आपसी समन्वय से निर्धारित गतिविधियों का आयोजन करने के निर्देश दिए गए हैं।

गांव की जरूरत से गांव की योजना तक

रिफॉर्म उत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यही है कि इसमें विकास की दिशा ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि गांव की जरूरतों से गांव की योजना की ओर ले जाने का प्रयास है। ग्रामीणों की आवाज, श्रमिकों का अधिकार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और ग्राम सभा की निर्णयकारी भूमिका—ये सभी मिलकर सहभागी ग्रामीण विकास की तस्वीर तैयार करते हैं।

धमतरी जिले में 2 अक्टूबर से आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका से जुड़े अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ जल संरक्षण, टिकाऊ परिसंपत्तियों, ग्रामीण अधोसंरचना और पंचायत विकास की प्राथमिकताओं पर सामूहिक संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा।

अभियान के दौरान जागरूकता गतिविधियों के फोटो, वीडियो और हितग्राहियों के अनुभव (टेस्टिमोनियल) भी संकलित किए जाएंगे, ताकि जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों और जनभागीदारी को व्यापक रूप से सामने लाया जा सके।

जनभागीदारी से विकसित गांव की ओर

रिफॉर्म उत्सव का मूल संदेश यही है कि विकसित गांव केवल निर्मित अधोसंरचना का नाम नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों, सुरक्षित आजीविका, मजबूत स्थानीय संस्थाओं और सहभागी निर्णय प्रक्रिया से बनता है।

जब ग्राम सभा में ग्रामीण अपनी जरूरत बताते हैं, श्रमिक अपने अधिकार समझते हैं, महिलाएं आजीविका के नए अवसरों से जुड़ती हैं और पंचायत स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर विकास योजना तैयार करती है, तब गांव का विकास एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामुदायिक संकल्प और सामूहिक प्रयास का रूप लेता है।

धमतरी में रिफॉर्म उत्सव इसी जनभागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है—जहां रोजगार अधिकार से जुड़ेगा, श्रम विकास से जुड़ेगा और ग्राम सभा गांव के भविष्य की योजना से जुड़ेगी।