जकड़बाधा में किसानों को फसल प्रबंधन की बारीकियों से कराया गया अवगत, विशेषज्ञों ने धान की बेहतर पैदावार के लिए समय पर पोषक तत्व व दवा प्रबंधन पर दिया जोर
मुंगेली/लोरमी। दिनांक 4 अक्टूबर को ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं मां कल्याणी कृषि केंद्र दरवाजा के संयुक्त तत्वावधान में लोरमी विकासखंड के ग्राम जकड़बाधा के सुदूर क्षेत्र में किसान प्रशिक्षण एवं फसल प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान एवं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कंपनी के विशेषज्ञों ने किसानों को वर्तमान फसल की स्थिति के अनुरूप धान में पोषक तत्वों के प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा सही समय पर दवा एवं पोषक तत्वों के छिड़काव से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का आयोजन मां कल्याणी कृषि केंद्र दरवाजा के प्रोपराइटर मुकेश जायसवाल एवं गोविंद जायसवाल द्वारा किया गया। इस दौरान ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बिलासपुर रीजन के एरिया सेल्स मैनेजर लालाराम जायसवाल, रायपुर से डेवलपमेंट मैनेजर राहुल गुलिया, क्षेत्रीय डेवलपमेंट ऑफिसर कमलेश कश्यप एवं पुष्परंजन साहू सहित कंपनी के अन्य प्रतिनिधि एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
धान की वर्तमान अवस्था में पोषक तत्वों की जरूरत पर विशेष जोर
किसानों को संबोधित करते हुए कंपनी के विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में धान की फसल महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। धान में गभोट/गर्भावस्था एवं बालियां निकलने से पहले की अवस्था फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस समय पौधों को पर्याप्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, ताकि बालियों का बेहतर विकास हो सके और दाने में पर्याप्त भराव सुनिश्चित हो।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि इस अवस्था में पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्व की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। समय पर पोषक तत्व उपलब्ध होने से पौधे की मजबूती, बालियों के विकास तथा दाने के भराव में मदद मिल सकती है। किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई।
के-20 उत्पाद के बारे में दी गई जानकारी
कार्यक्रम में ट्रॉपिकल एग्रोसिस्टम के के-20 उत्पाद के संबंध में भी किसानों को विस्तृत जानकारी दी गई। कंपनी के प्रतिनिधियों के अनुसार यह एक जैविक उत्पाद है, जिसमें 20 प्रतिशत ऑर्गेनिक पोटाश एवं 1.5 प्रतिशत सल्फर की मात्रा बताई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि धान की गर्भावस्था अथवा बालियां निकलने से पूर्व उचित समय पर इसका छिड़काव फसल प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को यह भी समझाया कि फसल में किसी भी पोषक तत्व या कृषि दवा का उपयोग खेत की वास्तविक स्थिति, फसल की अवस्था एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए। सही समय पर उचित प्रबंधन करने से किसानों को फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।
रोग एवं कीट नियंत्रण की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान धान की फसल में संभावित रोग एवं कीटों की पहचान तथा उनके नियंत्रण को लेकर भी किसानों से चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि फसल में रोग या कीट दिखाई देने के बाद ही नहीं, बल्कि उनकी संभावित स्थिति को देखते हुए समय पर निगरानी और आवश्यक प्रबंधन करना जरूरी है।
इस दौरान कंपनी के आइसोडियन उत्पाद के संबंध में भी जानकारी दी गई। कंपनी प्रतिनिधियों ने इसे ट्रिपल फंगीसाइड केमिकल का संयुक्त मिश्रण बताते हुए धान में लगने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों के नियंत्रण में इसके उपयोग के बारे में जानकारी साझा की।
इसी तरह धान में लगने वाले रसचूसक कीटों एवं माहू के नियंत्रण के लिए कंपनी के नवीनतम उत्पाद टेग वारियर टॉप के बारे में भी किसानों को बताया गया। विशेषज्ञों ने रसचूसक कीटों की पहचान, फसल पर उनके प्रभाव तथा समय रहते नियंत्रण के उपायों को लेकर किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
महिलाओं की भी रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें केवल पुरुष किसान ही नहीं, बल्कि ग्राम की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं ने फसल प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण एवं दवा के उपयोग से संबंधित विभिन्न सवाल पूछे। कंपनी के विशेषज्ञों ने किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विस्तार से जवाब दिया और खेत की परिस्थितियों के अनुसार फसल प्रबंधन को लेकर आवश्यक सुझाव दिए।
इस दौरान किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच प्रश्नोत्तरी के माध्यम से संवाद हुआ, जिससे किसानों को अपने खेतों में आ रही समस्याओं को सीधे विशेषज्ञों के समक्ष रखने का अवसर मिला। ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम से सुदूर क्षेत्र के किसानों को कृषि संबंधी आधुनिक जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हुई।
वरिष्ठ किसानों का गमछा भेंटकर किया सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर ग्राम के वरिष्ठ एवं अनुभवी किसानों का गमछा भेंटकर सम्मान किया गया। इस दौरान किसानों के अनुभवों को भी साझा किया गया तथा बेहतर फसल उत्पादन के लिए आपसी संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मां कल्याणी कृषि केंद्र दरवाजा के प्रोपराइटर मुकेश जायसवाल एवं गोविंद जायसवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने कहा कि ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में किसानों तक कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी पहुंचाने का उद्देश्य यही है कि किसान अपनी फसल की अवस्था को समझते हुए सही समय पर आवश्यक प्रबंधन कर सकें।

कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी को उपयोगी बताते हुए इस तरह के किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई।



