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सहकारिता आंदोलन को गति देने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाएं कार्ययोजना : डॉ. आशीष भूटानी  

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रायपुर : सहकारिता आंदोलन को गति देने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाएं कार्ययोजना : डॉ. आशीष भूटानी

 

 

 

 

 

अगला राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन जनवरी में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में होगा

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026

 

भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने कहा है कि देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए सभी राज्यों को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। सहकारिता के लिए पूरे देश में एक ही मॉडल लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कार्यशाला में हुए विचार-विमर्श के आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसके क्रियान्वयन की समयबद्ध समीक्षा करने पर जोर दिया।

 

डॉ. भूटानी बस्तर जिले में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन ‘सहकार से समृद्धि’ के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आगामी दो से तीन वर्षों में लगभग 95 हजार नई प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के गठन का लक्ष्य है। इससे ग्राम स्तर पर सहकारिता का आधार मजबूत होगा। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिरता के लिए पैक्स का आर्थिक रूप से सक्षम और सक्रिय होना जरूरी है।

उन्होंने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने और सहकारी उत्पादों की वैश्विक पहचान बनाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई।

सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने नाबार्ड द्वारा विकसित किए जा रहे एकीकृत कोर बैंकिंग सॉल्यूशन प्लेटफॉर्म की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी उन्नयन से सहकारी बैंकों की सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही साइबर सुरक्षा मजबूत करने और वित्तीय जोखिमों से बचाव के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने पैक्स कंप्यूटरीकरण के पहले चरण को दिसंबर तक पूरा करने और लंबित ऑडिट कार्य अक्टूबर तक निपटाने पर भी जोर दिया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डॉ. भूटानी ने देशव्यापी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत गोदाम निर्माण में तेजी लाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त किसानों के लिए टिकाऊ स्थानीय विपणन विकल्प विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने गांवों में असंगठित दुग्ध संकलन केंद्रों को औपचारिक डेयरी सहकारी समितियों में बदलने की जरूरत भी बताई।

सम्मेलन के समापन पर डॉ. भूटानी ने आयोजन की बेहतर व्यवस्था और आतिथ्य के लिए छत्तीसगढ़ सरकार तथा बस्तर जिला प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने बताया कि सहकारिता क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा के लिए अगला राष्ट्रीय सम्मेलन जनवरी 2027 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर तमिलनाडु की अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्रीमती पी. अमुधा, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सहकारिता श्री पंकज बंसल, संयुक्त सचिव सहकारिता श्री सिद्धार्थ जैन, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव सहकारिता डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं श्री रमेश कुमार शर्मा सहित विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव, पंजीयक और सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।