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33 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना का अटूट संकल्प, हर साल कठिनाइयों से जूझकर भी नहीं टूटती नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति की परंपरा, रायपुर रोड पर जसगीत, ढोलक और नगाड़ों की गूंज के बीच शिवाजी वार्डवासियों के सहयोग से निरंतर हो रही मां दुर्गा की भव्य आराधना

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33 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना में लीन नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति, हर साल कठिनाइयों को पार कर जगाती है भक्ति की अलख

 

रायपुर रोड पर आस्था और परंपरा का अनूठा संगम, शिवाजी वार्ड के सहयोग से लगातार 33 वर्षों से हो रही मां दुर्गा की स्थापना, नौ दिनों तक जसगीत, ढोलक और नगाड़ों की गूंज से भक्तिमय रहता है माहौल

 

मुंगेली। आस्था जब संकल्प बन जाती है, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। कुछ ऐसी ही मिसाल रायपुर रोड स्थित नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति ने पेश की है। समिति द्वारा लगातार 33 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सामूहिक सहयोग और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन चुकी है।

 

नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति द्वारा नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। प्रतिदिन सुबह और शाम नगाड़ों की धुन के साथ पूजा संपन्न होती है। वहीं, रात के समय जसगीत, ढोलक और नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। मां की आराधना में श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव से शामिल होते हैं। वर्षों से जारी इस धार्मिक परंपरा ने क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

 

हर साल आती हैं कठिनाइयां, फिर भी नहीं टूटता आस्था का संकल्प

 

समिति के सदस्यों के लिए हर साल दुर्गा उत्सव का आयोजन आसान नहीं होता। आयोजन के दौरान आर्थिक और अन्य व्यवस्थागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि समिति के सदस्यों को यह तक सोचना पड़ता है कि अगले वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी।

 

लेकिन मां के प्रति अटूट श्रद्धा, सदस्यों की आपसी एकजुटता और शिवाजी वार्ड के लोगों के सहयोग से एक बार फिर आयोजन की राह निकल आती है। जब सभी मिलकर प्रयास करते हैं, तो कठिनाइयों के बीच भी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना का संकल्प पूरा हो जाता है।

 

समिति की 33 वर्षों की यह यात्रा बताती है कि किसी भी परंपरा को जीवित रखने के लिए केवल उत्साह ही नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, समर्पण और सामूहिक सहयोग भी जरूरी होता है।

 

जनसहयोग से जीवित है 33 साल पुरानी परंपरा

 

नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति के सदस्यों के साथ शिवाजी वार्ड के लोगों का सहयोग इस आयोजन की महत्वपूर्ण ताकत है। हर वर्ष आने वाली चुनौतियों के बावजूद लोगों के सहयोग से दुर्गा उत्सव की परंपरा आगे बढ़ती रही है। यह आयोजन समाज में धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।

 

33 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की यह परंपरा उन सभी लोगों की श्रद्धा और मेहनत का परिणाम है, जो परिस्थितियां विपरीत होने पर भी आयोजन को जारी रखने का प्रयास करते हैं।

 

नव प्रभात दुर्गा उत्सव समिति की यह यात्रा संदेश देती है कि सच्ची आस्था केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपनी परंपराओं और संकल्पों को जीवित रखने में भी है।

 

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