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मुंगेली जिले के ग्राम पंचायतों में सरकारी खजाने की बंडर बाट ! फर्जी बिलों से निकाली गई राशि, पहले से हुए काम को दोबारा दिखाकर भुगतान का खेल?

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मुंगेली जिले के ग्राम पंचायतों में सरकारी खजाने की बंडर बाट ! फर्जी बिलों से निकाली गई राशि, पहले से हुए काम को दोबारा दिखाकर भुगतान का खेल?

 

15वें वित्त आयोग की राशि पर सबसे ज्यादा सवाल, अस्तित्वहीन फर्मों के नाम से बिल लगाने और बिना GST वाले बिलों से भुगतान करने के आरोप, THEभारत24 करेगा पंचायतवार बड़ा खुलासा

 

मुंगेली। मुंगेली जिले की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आने की आशंका है। पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आने वाली शासकीय राशि के उपयोग को लेकर कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होने पर पंचायत स्तर पर हुए कथित भ्रष्टाचार की कई परतें खुल सकती हैं। आरोप हैं कि जिले की कुछ ग्राम पंचायतों में फर्जी बिलों के सहारे सरकारी राशि निकालने का खेल खेला गया है। इसमें सबसे ज्यादा गड़बड़ी 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग में होने की बात सामने आ रही है।

 

जानकारी के अनुसार, कुछ ग्राम पंचायतों में ऐसे कार्यों को भी नए कार्य के रूप में दर्शाकर भुगतान निकालने के आरोप हैं, जो पहले ही पूरे हो चुके थे। यानी धरातल पर काम पहले से मौजूद था, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उसी कार्य को दोबारा नया बताकर राशि आहरित किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यदि इन मामलों की दस्तावेजों के आधार पर जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकारी धन का उपयोग वास्तव में विकास कार्यों में हुआ या फिर कागजों में ही विकास दिखाकर राशि निकाल ली गई।

 

अस्तित्वहीन फर्मों के नाम पर बिल लगाने का आरोप

 

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू फर्मों के नाम पर लगाए गए बिलों को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि कुछ ग्राम पंचायतों में ऐसी फर्मों के बिल लगाए गए, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही संदिग्ध है। वहीं कुछ बिलों में GST संबंधी आवश्यक विवरण नहीं होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर संबंधित पंचायतों में इन बिलों का सत्यापन किसने किया? क्या भुगतान से पहले फर्मों और बिलों की वास्तविकता की जांच की गई थी? यदि नहीं, तो सरकारी राशि के भुगतान की जिम्मेदारी किसकी है?

 

15वें वित्त की राशि पर क्यों उठ रहे सवाल?

 

15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राशि का उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास करना है। इस राशि से स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन यदि इसी राशि का उपयोग फर्जी बिलों अथवा पहले से पूर्ण कार्यों को दोबारा दर्शाकर भुगतान निकालने में किया गया है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय है।

 

जांच हुई तो खुल सकते हैं कई बड़े राज

 

इस पूरे मामले में पंचायतों के कैशबुक, बिल-वाउचर, भुगतान रजिस्टर, बैंक स्टेटमेंट, कार्य स्वीकृति आदेश, मूल्यांकन रिपोर्ट, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और संबंधित फर्मों के दस्तावेजों की जांच बेहद जरूरी है। इन दस्तावेजों के मिलान से यह पता लगाया जा सकता है कि किस पंचायत में कितनी राशि निकाली गई, किस कार्य के नाम पर भुगतान हुआ और संबंधित कार्य वास्तव में धरातल पर हुआ भी है या नहीं।

 

THEभारत24 करेगा एक-एक ग्राम पंचायत का पर्दाफाश, सामने आएगा पूरा हिसाब!

 

मुंगेली जिले में पंचायत स्तर पर सामने आ रहे इन गंभीर आरोपों को लेकर THEभारत24 ने विशेष पड़ताल शुरू की है। आने वाले दिनों में जिले की एक-एक ग्राम पंचायत का नाम, संबंधित दस्तावेज, बिलों का विवरण, भुगतान की राशि और कथित अनियमितताओं से जुड़े हर पहलू को जनता के सामने लाया जाएगा।

 

किस ग्राम पंचायत में किस काम के नाम पर राशि निकाली गई? किन फर्मों के नाम पर बिल लगाए गए? क्या संबंधित फर्म वास्तव में मौजूद हैं? पहले से हो चुके कार्यों को दोबारा कागजों में दिखाकर भुगतान तो नहीं निकाला गया? 15वें वित्त की राशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ? इन सभी सवालों की दस्तावेजों के आधार पर पड़ताल की जाएगी।

 

THEभारत24 इस मामले में किसी भी पंचायत या व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी नहीं ठहराएगा, बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर पूरे मामले को जनता के सामने रखेगा।प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 

 

यह सिर्फ शुरुआत है, अभी कई और खुलासे बाकी हैं। मुंगेली जिले की हर पंचायत का हिसाब जनता के सामने आएगा।

 

THEभारत24

सच के साथ।