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Chhattisgarh : अब स्कूलों का स्कोर कार्ड और अफसरों का बनेगा जॉब चार्ट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों का अब स्कोर कार्ड बनेगा। स्कोर कार्ड बच्चों के लर्निंग आउटकम के आधार पर ही निर्धारित किया जाएगा। शिक्षकों का नवाचार, पढ़ाने का तरीका, बच्चों की बेहतर उपस्थिति आदि स्कूलों के स्कोर कार्ड को बढ़ाएंगे। इसके अलावा राज्य के सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों में बैठे अधिकारियों के लिए जॉब चार्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद उनके कामों की समीक्षा होगी।

हर अधिकारी के लिए तय होगा कि कौन सा काम कितने दिन में पूरा होना चाहिए। अभी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में देखा जाए तो मान्यता देने की प्रक्रिया में ही देरी की जाती है। ऐसे में अब विभाग सबकी जिम्मेदारी तय करने जा रहा है।

राज्य के समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी, संभागीय कार्यालयों समेत अन्य विभागों में अभी अफसरों को मनमानी काम दिए गए हैं। किसी एक अधिकारी के पास कई प्रभार हैं तो किसी अधिकारी के पास दिनभर में एक भी फाइल बढ़ाने का काम ही नहीं है।

ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने हर अधिकारी के लिए जॉब चार्ट बनाने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने जॉब चार्ट निर्धारित करने के लिए निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि शिक्षा संहिता में जॉब चार्ट का प्रावधान था लेकिन पिछली सरकार में इसका पालन नहीं हो पा रहा था । वर्तमान सरकार अब जॉब चार्ट के आधार पर अधिकारियों से काम लेगी।

प्रमुख सचिव ने यह दिया निर्देश- राज्य में शालाओं के सतत आंकलन और सुधार के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न सूचकांकों के आधार पर प्रत्येक शालाओं की मात्रात्मक एवं गुणात्मक जानकारी तैयार की जा सकेगी। जिसमें शालाओं की वस्तुनिष्ठ समीक्षा हो सकेगी। उन्हें सतत सुधार की ओर प्रेरित किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव ने स्कोर कार्ड के सूचकांकों की समीक्षा का स्कोर कार्ड का प्रस्ताव बनाने के लिए कहा है।

शिक्षकों के लिए बनेगी नई अवार्ड नीति- प्रदेश में शिक्षकों के लिए अब पुराने ढर्रे की बजाय नए सिरे से नए मापदंडों के आधार पर उन्हें अवार्ड दिया जाएगा। शालाओं के आंकलन के बाद जो शिक्षक बेहतर नवाचार से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करेगा उसे ही अवार्ड मिल सकेगा।

गठित होगा आंकलन सेल- स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में आंकलन सेल गठित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में सेंटर स्थापित किए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, समग्र शिक्षा से आंकलन कार्य से जुड़े अधिकारी, शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं से आंकलन प्रकोष्ठ प्रभारी और सामग्री निर्माण प्रकोष्ठ प्रभारी, निजी शिक्षा कॉलेजों और विद्यालयों से प्रतिनिधि आदि की कमेटी बनाई जाएगी।

उपस्थिति को देखेगी शाला प्रबंधन समिति- स्कूलों में बच्चों की कितनी उपस्थिति है। समुदाय के माध्यम से एक बार कक्षा का आयोजन कराकर शैक्षणिक विकास की जानकारी दी जाएगी।

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