Home समाचार पारंपरिक खेती छोड़ने पर आएंगे अच्छे दिन, समृद्ध होंगे किसान

पारंपरिक खेती छोड़ने पर आएंगे अच्छे दिन, समृद्ध होंगे किसान

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लागत के अनुरूप आय नहीं होने, फसल का उचित दाम नहीं मिलने से आज छोटे किसान आत्महत्या कर रहे हैं. खेती-किसानी छोड़कर दिल्ली, पंजाब, मुंबई में नौकरी कर रहे हैं. लेकिन पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक से खेती करने पर यह किसान भी गांव में रहकर 15 से 20 हजार रुपया महीना कमा सकते हैं. इसे साबित कर दिखाया है बेगूसराय जिला के शकरपुरा निवासी किसान कृष्णदेव राय ने.

20 साल पहले तक अमानत करने वाले कृष्णदेव राय की इतनी आय नहीं थी कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा दे सकें, घर-मकान बना सकें. लेकिन अचानक से खेती के प्रति जगी ललक से अमानत छोड़कर किसान बन गए. पारिवारिक समस्याओं के कारण बंधक लगा सात बीघा जमीन, उसी महाजन से लीज पर लेकर उन्होंने मेंथा और गन्ना की नई तकनीक से खेती शुरू कर दी. समुचित आय हुई तो मनोबल बढ़ा और बढ़ते जोश में नई नई तकनीक से संपन्न विभिन्न खेती किया. आज हालात यह है कि अच्छा घर-मकान बन गया. दोनों पुत्र बैंगलोर में पढ़कर इंजीनियर बन गये. बंधक रखा सातों बीघा खेत दो साल में ही अपना हो गया है.

अब मेंथा की खेती छोड़कर पपीता, गन्ना, टमाटर, परवल, शिमला मिर्च, सब्जी आदि से प्रत्येक वर्ष छह से आठ लाख रुपया कमा रहे हैं. इसके साथ ही खेती किसानी की नई तकनीक इंटर क्रॉपिंग, मल्चिंग एवं ड्रीप लाइन का उपयोग कर दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं. खेतों पर जाकर उन्हें सिखा रहे हैं. कृष्ण देव राय कहते हैं कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा किसानों के साथ सभी के अच्छे दिन आएंगे. लेकिन इसके लिए मोदी जी हमारे खेत पर आकर कुछ नहीं कर सकते हैं. हम सब किसानों को डिजिटल यानी नई तकनीक से खेती करनी होगी और इससे जरूर आएंगे अच्छे दिन.

2017 में इन्होंने इंटर क्रॉपिंग कर सीओ 0238 गन्ना के साथ पुखराज किस्म का आलू लगाया था. फसल अच्छी हुई, आलू 26 मन प्रति कठ्ठा हो गया. जांच में आए विशेषज्ञ ने आलू के साथ गन्ना को बिहार में सबसे बेहतर रिपोर्ट की. इसके बाद दिल्ली में आयोजित समारोह में तत्कालीन कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के हाथों राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला. 2018 में राज्य के कृषि मंत्री द्वारा तथा कृषि विश्वविद्यालय पूसा में अभिनव सम्मान मिला. उन्होंने बताया कि पारंपरिक तरीके से हो रही खेती में 15 से 20 हजार खर्च करने पर मौसम के साथ देने पर 25 से 30 हजार मिलता है. लेकिन नई तकनीक की खेती में 15 से 25 हजार खर्च करने पर 30 हजार से अधिक आय हो जाती है.

किसानों के फसल में लागत का एक बड़ा भाग कीटनाशक पर खर्च हो जाता है. लेकिन इसके लिए नई तकनीक में क्रॉप गार्ड विकसित किया गया है. यह कीटनाशक के छिड़काव पर 15 से 20 हजार खर्च एवं शरीर तथा फसल पर कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से मुक्त करता है. क्रॉप गार्ड के पीला एवं नीला पॉलिथीन में विशेष गोंद लगाकर दस-दस फीट की दूरी पर खेत में लगाया गया है. फसल पर आने वाला कीट इसी दोनों पॉलिथीन में चिपक कर मर जाते है और खर्च है मात्र 15 से 18 सौ रुपया छमाही.