Home समाचार उस्ताद अमजद अली खां मुश्किल में, मांगी 5 करोड़ रुपए की आर्थिक...

उस्ताद अमजद अली खां मुश्किल में, मांगी 5 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद, जानें क्या है मामला

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003
IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

अपने सरोद के सुरों से दुनिया भर के श्रोताओं को झुमा देने वाले सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां को पांच करोड़ रुपए की जरूरत है. इसके लिए उन्होंने मध्य प्रदेश की सरकार, सिंधिया परिवार और उद्योगपतियों से मदद की गुहार लगाई है. वास्तव में अपने ग्वालियर स्थित घर को म्यूजियम में बदल चुके उस्ताद अमजद अली गंभीर आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं. उनका कहना है कि म्यूजियम में बदल चुके उनके सरोद घर को मेंटेन करना उनके लिए मुश्किल है. इसी के लिए उन्हें 5 करोड़ रुपए की जरूरत है.ग्वालियर पहुंचे सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां ने कहा- ‘मैं अपील करना चाहता हूं कि ग्वालियर के इंडस्ट्रियलिस्ट, सिंधिया परिवार, या मप्र सरकार या सीएम कमलनाथजी या कोई 5 लोग मिलकर यह राशि दिलवा दें. ताकि, सरोद घर का जो भी काम रिपेयर का शुरू हुआ है, वो पूरा हो जाए. फिक्स्ड डिपोजिट के इंटरेस्ट से सरोद घर का फ्यूचर बना रहेगा.’

स्कूल के दिनों को किया याद उन्होंने मीडिया से बातचीत में ग्वालियर में अपने जन्म को अपना सौभाग्य बताया. साथ ही कहा कि मेरा जन्म स्थान सरोद घर है. मेरे पिता उस्ताद हाफिज अली खां साहब का जन्म भी यहीं हुआ था. सरोद घर में उनकी प्रतिमा है. यह संगीतज्ञों की यादगार है. उन्होंने बताया कि उनके पिताजी महाराजा सिंधिया के कोर्ट म्यूजिशियन थे. दिल्ली में म्यूजिक इंस्टीट्यूट भारतीय कला केंद्र खुला था. इसलिए 1957 में हम लोग ग्वालियर से दिल्ली में आ गए. दिल्ली में पिताजी ने कला केंद्र में नौकरी कर ली.

ग्वालियर में अपने स्कूल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि माधवगंज मिडिल स्कूल और गोरखी स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की है. ग्वालियर में माधव म्यूजिक कॉलेज बना तो उस जमाने के महाराज ने पिताजी को कहा कि खां साहब आप कभी देख लिया करिए कि स्कूल कैसा चल रहा है, वहां से उन्हें 150 रुपए महीना मिलता था. देश भर से लोग उन्हें बुलाते थे. 1963 में मेरा पहला फॉरेन टूर अमेरिका का हुआ.

उस्ताद अमजद अली खां ने बताया कि उनकी संगीत की यात्रा 12 साल की उम्र से शुरू हो गई थी. उन्हें पहला अवॉर्ड प्रयाग संगीत समिति से मिला. वह हर साल पिताजी के नाम से अवॉर्ड देते हैं. उनके निमंत्रण पर सरोद घर में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, केआर नारायणन, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी आ चुके है.