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छुट्टी पर आराम के बजाए सेना के लिए तैयार कर रहे जवानों की नई खेप…

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एक सैनिक जब छुट्टी लेकर घर आता है तो वह सैनिक जीवन को भूलकर कु छ आराम करना चाहता है, लेकि न दो माह की छुट्टी पर आए बेटमा के विजय यादव यहां भी अपनी सैन्य दिनचर्या को ही जी रहे हैं। उनका मकसद अपने गांव के युवाओं को काबिल बनाना है और इसीलिए वे उन्हें सेना में भर्ती होने के लिए शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे हर साल छुटि्टयों में आकर युवाओं को मुफ्त में प्रशिक्षण देते हैं। उनकी एक ही शर्त है अनुशासन और इसी का नतीजा भी सामने है, जिसे मानकर पिछले सात सालों में उनके 50 से अधिक शागिर्द सेना में भर्ती हो चुके हैं।

बेटमा के दशहरा मैदान पर इन दिनों सेना भर्ती कैंप जैसा नजारा है। यहां सुबह छह बजे से ही युवा दौड़, लंबी कूद, बीम आदि करते हैं। ये सभी भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते हैं और विजय यादव इन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। जामनगर में तैनात विजय रोजाना सुबह दो घंटे युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। वे भर्ती के दौरान अधिकारियों से बातचीत करने के लहजे और लिखित परीक्षा के टिप्स भी देते हैं।

चार सौ मीटर का ट्रैक बनवाया 

विजय ने प्रशिक्षण के लिए यहां कु छ अस्थायी तैयारियां भी की हैं। उन्होंने चार सौ मीटर दौड़ के लिए एक ट्रैक, जबकि लंबी कू द के लिए दस फीट लंबा गड्ढा बनवाया है। रस्सी चढ़ने के साथ दूसरे कई शारीरिक अभ्यास के लिए उन्होंने इंतजाम कि ए हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में बेटमा सहित आसपास के करीब 70 युवा आ रहे हैं।

ट्रेनिंग के समय मिले पुरस्कार

विजय अब तक भारतीय सेना के साझा युद्धाभ्यासों में चीन और अमेरिका की सेना के साथ युद्धाभ्यास कर चुके हैं। वे कु पवाड़ा, बारामुला, असम आदि स्थानों पर भी तैनात रह चुके हैं। सेना में उन्हें ट्रेनिंग के दौरान कई बार बेस्ट स्टूडेंट का पुरस्कार भी मिला। ट्रेनिंग देने के पीछे विजय का एक ही मकसद है कि वे जिन कारणों से दो बार चूक गए, उसका सामना किसी और को न करना पड़े।

तीसरी बार में हुए सफल

विजय के मुताबिक नियमों की जानकारी के अभाव में वे दो बार सेना भर्ती में चूके। इसके अलावा वे सिर्फ दौड़ते थे। यह पता नहीं था कि सीने का माप भी जरूरी है। उन्होंने इन सबकी तैयारी की और तीसरी बार में सफल हो गए। उन्होंने वर्ष 2007 से युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया, जबकि वर्ष 2012 में पहली बार उनके द्वारा प्रशिक्षित एक युवक का सेना में चयन हुआ।