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असली के नाम पर ‘नकली’ का खेल, ऐसे बेवक़ूफ़ बन रहे हैं आप…जानिए

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लेवाइस की जींस मात्र तीन सौ रूपये में। यह पढ़कर आपको आश्चर्य हो सकता है, लेकिन यह सच है। नामी गिरामी ब्रांड की टैग वाले जीन्स, शर्ट, जैकेट, जूते, टी-शर्ट आदि से शहर के बाजार अटे पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब नब्बे फीसदी मार्केट पर इस लोकल या दिल्ली मेड का दबदबा है। अगर ब्रांडेड शर्ट, जीन्स या टी-शर्ट चाहिए भी तो दुकानदार को एडवांस पैसा देकर मंगवाना पड़ता है, लेकिन इसमें भी धोखा होने के आसार रहते हैं। 

बाजार में मौजूद हर दस में से आठ दुकानदार सस्ते से सस्ते दाम पर ग्राहक को ब्रांडेड के के नाम पर डुप्लीकेट जींस बेच रहे हैं। डुप्लीकेट ब्रांडिंग का यह माल दुकानदार मुख्त: दिल्ली से लेकर आते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि दिल्ली में देवनगर आदि क्षेत्रों में इन कपड़ों पर टैगिंग का काम किया जाता है। वहां से यह माल पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों से जाने वाले व्यापारियों को बेचा जाता है। एक अन्य दुकानदार ने बताया कि ग्राहकों को भी पता होता है कि वे डुप्लीकेट माल खरीद रहे हैं। लेकिन हां, अगर दुकानदार ब्रांडेड बताकर इन कपड़ों को बेच रहा है तो यह पूरी तरह गलत है। हमने एक ग्राहक से पूछा तो उसने बताया कि टैगिंग से लेकर सिलाई तक, लगभग हर चीज ओरिजनल कपड़े की तरह होने की वजह से इसमें अंतर कर पाना भी मुश्किल है। तो सावधान हो जाएं और ब्रांडेड कपड़े खरीदने अगर घर से निकलें तो जरा संभल कर चेक कर लें।

क्या है नियम?

कॉपीराइट एक्ट के तहत कंपनियां अपने लोगो का कॉपीराइट कराती है। इसके बाद उनका लोगो किसी भी अन्य कंपनी या व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति के इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

असली…नकली का अंतर

कंपनीअसली की कीमतडुप्लीकेट की कीमत
लेवाइस शर्ट800 से 1500300 से 500
डीजल जींस1200 से 2500250 से 600
मुफ्ती जींस1600 से 3200400 से 1000
स्पाइकर जींस 1200 से 3500 250 से 700