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भारत के साथ खड़ा हुआ अमरीका, एक झटके में चीन और पाकिस्तान की कर दी बोलती बंद…

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चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर भारत की चिंताओं का अमेरिका ने समर्थन किया है। भारत अकेला बड़ा देश है, जो चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विरोध कर रहा है। भारत का कहना है कि वन बेल्ट वन रोड के तहत प्रमुख परियोजना चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) है, जो गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत को इस परियोजना के गुलाम कश्मीर से गुजरने पर आपत्ति है, क्योंकि इसे वह अपना हिस्सा मानता रहा है।

अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की प्रमुख उप सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने कहा, भारत को जबसे वन बेल्ट वन रोड परियोजना के भूराजनीतिक तत्वों का पता चला है, तब से वह इसका विरोध कर रहा है। हम भारत की इस चिंता से सहमत हैं कि किसी भी आर्थिक परियोजना की कीमत संप्रभुता नहीं हो सकती है। वेल्स ने कहा कि श्रीलंका अकेला ऐसा देश नहीं है, जिसने एक महत्वपूर्ण उपक्रम पर अपना स्वामित्व खो दिया। उनका इशारा हंबनटोटा बंदरगाह चीन को 99 साल की लीज पर दिए जाने को लेकर था।

उल्लेखनीय है कि चीन के कर्ज में फंसे श्रीलंका ने यह बंदरगाह उसे लीज पर दे दिया है। रोचक बात ये है कि हंबनटोटा राजपक्षे भाइयों का गृह नगर है। पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का जिक्र करते हुए वेल्स ने कहा कि वह इसको लेकर भारत की चिंता को समझती हैं, क्योंकि इसका आर्थिक आधार अब तक अस्पष्ट है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह चीन से ‘सीपीईसी’ पर सख्ती से सवाल पूछे। एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कड़ा हमला बोलते हुए दावा किया कि इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। सीपीईसी सड़क, रेलवे और ऊर्जा परियोजनाओं का एक योजनागत तरीके से तैयार नेटवर्क होगा।