Home समाचार खौफ में पाकिस्तान : इमरान खान को सताया डर, कहीं भारत…

खौफ में पाकिस्तान : इमरान खान को सताया डर, कहीं भारत…

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जहां एक तरफ देश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बवाल मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत से डर लगा रहा है।

दरअसल, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने शनिवार को आशंका जताई है कि भारत घरेलू परिस्थितियों से ध्यान भटकाने के लिए उसके खिलाफ ‘छद्म कार्रवाई’ कर सकता है और साथ ही चेतावनी दी कि पाकिस्तान ऐसी किसी भी कार्रवाई का मुहंतोड़ जवाब देगा। इतना ही नहीं इमरान ने इसको लेकर कई ट्वीट किया, और कहा कि मोदी सरकार में भारत ‘फासीवादी विचारधारा’ के साथ ‘हिंदू राष्ट्र’ की ओर से बढ़ रहा है।

पाकिस्तान पर खतरा भी बढ़ रहा है:इमरान खान

इमरान खान ने भारत में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर कहा कि ज्यादातर भारतीय इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और यह अब जन आंदोलन बनता जा रहा है। खान ने कहा कि भारत में जिस तरह से विरोध प्रदर्शन बढ़ रहा है, उससे पाकिस्तान पर खतरा भी बढ़ रहा है और भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत की नियंत्रण रेखा पर हालात को लेकर की गई टिप्पणी से ‘छद्म कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की चिंता भी बढ़ गई है।

बता दें कि जनरल रावत ने बुधवार को कहा था कि जम्मू-कश्मीर से लगते नियंत्रण रेखा पर कभी भी तनाव बढ़ सकता है और सेना को इसके लिए तैयार है।

इमरान की गीदड़ भभकी

इमरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी दी कि अगर नयी दिल्ली उसके खिलाफ काई कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान के पास भारत को जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। खान ने ट्वीट कर कहा कि मैं इस बारे में कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताता रहा हूं और फिर दोहराता हूं कि अगर भारत अपने घरेलू अव्यवस्था से ध्यान भटकाने और हिंदू राष्ट्रवाद के लिए युद्ध आक्रमकता को बढ़ावा देता है तो पाकिस्तान के पास माकूल जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

इससे पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने जनरल रावत की टिप्पणी को घरेलू मामले से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया था।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री खान ने संशोधित नागरिकता कानून की आलोचना करते हुए कहा था कि यह मानवाधिकार के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और पाकिस्तान के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के विस्तारवादी रणनीति का हिस्सा है।