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Google पर बंदिश से मात्र 3,000 रुपये में आएगा स्मार्टफोन! कंपनियां खुश, ग्राहक भी मौज में

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Google Android Policy Changes – गूगल (Google) द्वारा अपनी एंड्रॉयड पॉलिसी में बदलाव करने से मोबाइल यूजर्स अब उन एप्‍स को स्वचालित रूप से अपडेट करने में सक्षम होंगे जिन्हें उन्‍होंने गूगल प्‍ले स्‍टोर (Google Play Store) के अलावा थर्ड-पार्टी एप्‍प स्‍टोर से इंस्‍टाल किया है.

हाइलाइट्स

जीएमएस को हटाने से हैंडसेट की कीमत भी कम हो जाएगी.
यूजर्स के पास सर्च इंजन के कई विकल्प मौजूद होंगे.
स्‍वदेशी ऑपरेटिंग सिस्‍टम BharOS को बढ़ावा मिलेगा.

नई दिल्‍ली. गूगल ने अपनी एंड्रॉयड पॉलिसी (Google Android Policy Changes) में बदलाव करने का ऐलान किया है. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्मार्टफोन बाज़ार भारत में Android को कैसे संचालित किया जाए, यह गूगल तय करता आ रहा है. गूगल जो नियम (Google Rules) बनाता है उसे न केवल यूजर्स को बल्कि डेवलपर्स को भी मानना पड़ता है. गूगल की नीति में परिवर्तन से अब सरकार के स्वामित्व वाले देशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS के फलने-फूलने का रास्ता साफ हो गया है. इतना ही नहीं गूगल एप्‍स को इंस्‍टाल करने की अनिवार्यता हटने और एंड्रॉयड के Forked वर्जन का इस्‍तेमाल करने की छूट मिलने से बाजार में सस्‍ते मोबाइल हैंडसेट आने का रास्‍ता भी साफ हो गया है.

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा लगाए गए 1,338 करोड़ के जुर्माने से बचने के लिए गूगल सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था, लेकिन गूगल को कोर्ट में एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा था. इसके बाद गूगल ने बुधवार को भारत में एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म के लिए अपने नियमों में बदलाव करने की घोषणा कर दी.

बना सकेंगे एंड्रॉयड का Forked वर्जन
इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन निर्माताओं के पास अब एंड्रॉयड के स्वीकृत Forked संस्करण बनाने का विकल्प होगा. ऐसा होने से से मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. इससे कई भारतीय स्टार्टअप्स को फायदा मिल सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा स्‍वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्‍टम BharOS को होगा. मोबाइल निर्माता इस उपयोग करने के लिए अब स्‍वतंत्र हो जाएंगे.

स्मार्टफोन होंगे सस्ते
मोबाइल हैंडसेट निर्माता कंपनियां अब Google ऐप्‍स के लिए अलग-अलग लाइसेंस ले सकेंगी. पहले उन्‍हें गूगल मोबाइल सर्विसेज (GMS) के लिए लाइसेंस लेना होता था, जिससे उन्‍हें अपने हैंडसेट में जीमेल, गूगल मैप और गूगल प्‍ले स्‍टोर इंस्‍टाल करने की अनुमति मिलती थी. अब जीएमएस को हटाने से हैंडसेट की कीमत भी कम हो जाएगी. यह कंपनियों को 3,000 रुपये से कम कीमत वाले एंड्रॉयड स्मार्टफोन लॉन्च करने में मदद करेगा जो कि जीएमएस की अतिरिक्त लागत के कारण पहले संभव नहीं था.

गूगल के इस निर्णय से भारत में अल्ट्रा-किफायती फोन के लिए एक नया बाजार खुल गया है. नए नियम स्थानीय प्‍लेयर्स को फिर से स्मार्टफोन व्यवसाय में आने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. गूगल को इससे कोई नुकसान भी नहीं होगा क्‍योंकि उसे अपनी मोबाइल सेवाओं का उपयोग करने के लिए निर्माताओं से लाइसेंस शुल्क मिलता रहेगा.

यूजर्स को मिलेंगे ज्‍यादा विकल्‍प
गूगल द्वारा किये गए बदलावों के बाद अब यूजर्स के पास सर्च इंजन के रूप कई विकल्प मौजूद होंगे. यूजर्स डिवाइस सेट करते समय अपनी पसंद के सर्च इंजन जैसे बिंग (Bing) या डकडकगो (DuckDuckGo) का उपयोग कर सकेंगे. अब तक होता यह आया है कि एंड्रॉयड डिवासेज में प्री इंस्‍टाल्‍ड गूगल सर्च इंजन का उपयोग ही यूजर्स को करना होता था. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा. इस तरह यूजर्स को सर्ज इंजन के ज्‍यादा विकल्‍प उपलब्‍ध होंगे. गूगल की प्री इंस्‍टाल एप्‍स को यूजर्स हटा नहीं सकता था. गूगल द्वारा अपनी एंड्रॉयड पॉलिसी में बदलाव करने से अब मोबाइल निर्माताओं के लिए गूगल के ऐप्‍स के साथ अपने हैंडसेट बेचने अनिवार्य नहीं होंगे.