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राहुल गांधी पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला…एक नजर सर्वोच्च न्यायालय के आज की टिप्पणी से साफ है अंतिम परिणाम राहुल के लिए निराशाजनक होगी… चितरंजय पटेल,अधिवक्ता उच्च न्यायालय

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जांजगीर चांपा / राहुल गांधी पर सर्वोच्च न्यायालय के आज अंतरिम निर्णय को लेकर अति उत्साह में उनके समर्थक फैसले से हकीकत से परे टिप्पणी कर रहे हैं मानो राहुल को दोष मुक्त कर दिया गया हो जबकि कोर्ट की भाषा में स्पष्ट है कि विचारण न्यायालय के length of sentence (दीर्घ सजा) को उन्होंने उपयुक्त न मानते हुए उन्होंने उनके सजा पर रोक लगाई है जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में राहुल के आचरण को गलत ही माना है याने स्पष्ट है कि देश की सबसे बड़ी कोर्ट प्रथम दृष्टया उनको सजागत अपराध का दोषी मानता है।
ऐसे में क्षणिक रियायत को लेकर राहुल समर्थकों के द्वारा जारी ; सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं ; जैसे टिप्पणी उन पर ही उल्टी बैठती है, क्योंकि हालिया रियायत के बाद उनको दोषी ठहराया जाना एक प्रकार से सुनिश्चित है याने अभी तथाकथित कांग्रेस परिवार नीत न्यायाधीश के साथ टीम ने सजा की मात्रा के आधार पर ही विचारण न्यायालय के दंडादेश आक्षेपित किया है पर फैसले में आगे उन्होंने राहुल के आचरण को कदापि उचित नहीं माना है।
साफ है राहुल देर सबेर प्रकरण में दोषी ही साबित होंगे। फिर समर्थकों का यह कहना कि राहुल फिर दहाड़ेंगे समुचित प्रतीत नहीं होता क्योंकि इनके दहाड़ने से ही वे हमेशा विवाद में फंसते रहे हैं । कहें तो महामहिम
न्यायाधीशों के किसी साफ्ट कॉर्नर की दया ने अधिक सजा का हवाला देते हुए सजा पर लगाई गई रोक को कांग्रेसी मित्र दोषमुक्ति कदापि न समझें क्योंकि उन्हीं जजों ने आगे स्पष्ट कहा है कि राहुल के आचरण को कदापि उचित नहीं माना जा सकता।
फिर राहुल और पार्टी जनों को आज के फैसले को सकारात्मक रूप से कानूनी भाषा में सम्मानिय जजों के दया की भीख के रूप में स्वीकार करते हुए हुंकारने के बजाय जनता के हित में राहुल संयमित भाषा में आम लोगों की आवाज बने ताकि सशक्त विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें हम सब स्वीकार कर सकें …बस आज यही शुभकामना राहुल के लिए की जा सकती है बाकी भविष्य की राजनित में आगे आगे देखिए होता है क्या?