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मुंगेली जिले में जल जीवन मिशन पर सवाल – केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना लग गया ग्रहण,,

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मुंगेली

केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन मुंगेली जिले के सभी विकासखंड मुंगेली, लोरमी और पथरिया में इस योजना की जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। यहां लगभग एक, दो, और कही तीन साल से पहले ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पानी टंकी आज भी केवल सफ़ेद हाथी बनकर खड़ी है, जबकि गांव के लोग गर्मी की शुरुआत होते ही बूंद-बूंद पानी के लिए जूझने को मजबूर हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने गांव-गांव में नल जल योजना के माध्यम से हर घर पानी पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन यह दावा अब तक सिर्फ कागजों और सरकारी रिपोर्टों तक ही सीमित नजर आ रहा है। ग्राम पंचायतों में बनी पानी की टंकीयों का निर्माण कार्य करीब एक वर्ष पहले पूरा हो चुका है, पाइप लाइन भी बिछाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी घर के नल से पानी की एक बूंद भी नहीं निकली है।

 

 

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि टंकी बनने के बाद विभाग द्वारा केवल एक बार इसे चालू किया गया था। उस समय कई टंकीयों से पानी का भारी रिसाव शुरू हो गया, तो कही से अंडर ग्राउंड पाईप से लीकेज होने लगा क्यों की विभाग के द्वारा जिस जिस कम्पनी का पाईप दिया गया था वह स्तरहीन था और ज़ब पानी की टेस्टिंग की गयी तो खराब पाईप से जगह जगह लीकेज होने लगा और और पानी सप्लाई बंद हो गया। जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े हो गए। इसके बाद टंकी को बंद कर दिया गया और तब से लेकर आज तक इसे दोबारा चालू करने की कोई कोशिश नहीं की गई।

 

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांव में पानी का संकट गहराने लगता है। हैंडपंपों का जल स्तर नीचे चला जाता है और कई बार लोगों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। ऐसे में गांव के बीचों-बीच खड़ी पानी टंकी लोगों के लिए राहत का माध्यम बनने के बजाय भ्रष्टाचार और लापरवाही की याद दिला रही है।

 

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं जब उनका लाभ आम लोगों तक पहुंचे, लेकिन यहां हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।

कई पंचायत के सरपंचों का कहना है की पूर्व के सरपंच ने कमीशन या अधिकारीयों के दबाव में हेंड ओवर कर लिया है पर आज की स्थित में हमें भुगतना पड़ रहा है पूरा मूलभुत का पैसा इसके रखरखाव में और पाईप की रिपेरिंग में पैसा चला जा रहा है और ग्रामीणों तक पानी नही पहुंच पा रही है क्यों की पाईप इतनी खराब है की जगह जगह फट रही है इससे हम सरपंचों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और लोगों को पानी भी नही मिल पा रहा है। ये सब अधिकारियो और ठेकेदारों की लापरवाही का नतीजा है की ये जल जीवन मिशन योजना हम सरपंचों के लिए सर दर्द से कम नही है।

 

इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद विडंबनापूर्ण है, क्योंकि मुंगेली जिले के सभी विधानसभा क्षेत्र से ही छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और जल जीवन मिशन के मंत्री अरुण साव विधायक हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्री के अपने ही विधानसभा और गृह जिले में जल जीवन मिशन की यह हालत है, तो प्रदेश के अन्य इलाकों में योजना की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोरमी ब्लॉक के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी टंकियां पूरी तरह सफल नहीं हो पाई हैं। कई जगह पाइप लाइन बिछाने के बावजूद पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है, जबकि कागजों में योजनाओं को सफल बताकर रिपोर्ट भेजी जा रही है। पीएचई विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से कागजों में सफलता की कहानी तैयार करवाई जा रही है और मीडिया में भी योजनाओं की उपलब्धियां दिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर ग्रामीण अब भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। PHE विभाग के अधिकारी का कहना है की मुंगेली ब्लॉक में 103 पंचायत में और लोरमी ब्लॉक में 87 पंचायत में सफलता पूर्वक पानी की सप्लाई चालू कर दिया गया है। संबधित विभाग के अधिकारी का कहना था की हमने पानी चालू होते हुए सरपंच सचिव के साथ फोटो खिचवाकर विभाग और ठेकेदार ने हेंड ओवर कर दिया फिर विभाग ने न ही ठेकेदार ने दुबारा सुध नही लिया की ग्रामीणों को पानी मिल रहा है की नही बस रिकार्ड में चढ़ गया की पानी सप्लाई हो रही है जबकि हकीकत कुछ और बया कर रही है।

 

यदि जांच में निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

इधर मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार ने जिले में बढ़ती गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए कहा है कि पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी पानी की समस्या सामने आ रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को परेशानी न उठानी पड़े।

 

 

फिलहाल जिले के ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही टंकी को चालू कर घर-घर पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई, तो ग्रामीणों को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

जब तक गांव के नलों से पानी नहीं बहता, तब तक मुंगेली जिले की यह पानी टंकी विकास की कहानी नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की एक मूक गवाही बनकर खड़ी रहेगी।