Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ में पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, कड़े प्रवर्तन...

छत्तीसगढ़ में पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, कड़े प्रवर्तन के निर्देश

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003

*अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर बोले*, “*चालक ही नहीं*, *पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट अनिवार्य, सख्ती से होगा पालन*”

 *बीआईएस मानक हेलमेट के बिना दोपहिया डिलीवरी पर शोरूम जिम्मेदार*, *नियम 138(4)(f) लागू*

 *मोटरयान अधिनियम की धारा 129 के तहत चार वर्ष से अधिक आयु के सभी सवारों पर लागू नियम*

*रायपुर, -राज्य में सड़क सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की दिशा में परिवहन विभाग ने दोपहिया वाहनों पर हेलमेट उपयोग को लेकर व्यापक अभियान शुरू किया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठने वाले सहयात्री के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। इसके लिए मोटरयान अधिनियम, 1988 तथा केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के प्रावधानों के तहत कड़े प्रवर्तन के निर्देश जारी किए गए हैं।

अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों, अतिरिक्त आरटीओ तथा जिला परिवहन अधिकारियों को जारी निर्देशों में कहा है कि सार्वजनिक स्थान पर दोपहिया वाहन चलाने, सवारी करने या बैठने वाले चार वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। यह प्रावधान मोटरयान अधिनियम की धारा 129 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है, जिसमें निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षात्मक हेलमेट के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।

रविशंकर ने कहा, “धारा 129 केवल चालक तक सीमित नहीं है। यह पीछे बैठने वाले यात्रियों पर भी समान रूप से लागू होती है। हेलमेट सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोटों से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण है, बशर्ते इसे सही तरीके से बांधा गया हो।” उन्होंने बताया कि कानून में कुछ सीमित छूट का प्रावधान है, जैसे पगड़ी पहनने वाले सिखों के लिए, जबकि चार वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तय करने का अधिकार भी संबंधित प्राधिकरणों को दिया गया है।

विभाग ने केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 138(4)(f) को भी लागू किया है, जिसके तहत दोपहिया वाहन की बिक्री के समय निर्माता या डीलर द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो के अनुरूप हेलमेट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस प्रावधान के माध्यम से शोरूम संचालकों की जवाबदेही सीधे तौर पर तय की गई है।

रविशंकर ने स्पष्ट किया, “कोई भी डीलर मानक हेलमेट उपलब्ध कराए बिना वाहन की डिलीवरी नहीं कर सकता। नियमों के उल्लंघन पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने कहा कि प्रवर्तन की यह कार्रवाई केवल सड़क पर चलने वाले वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा।

यह निर्देश ऐसे समय जारी किए गए हैं, जब हेलमेट नियमों के कमजोर पालन को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी। पूर्व पार्षद एवं नहरपारा विकास समिति के अध्यक्ष रमेश आहूजा द्वारा दिए गए ज्ञापन में भी प्रवर्तन की ढिलाई का मुद्दा उठाया गया था और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

अपर परिवहन आयुक्त ने यह भी कहा कि केवल प्रवर्तन पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्थानीय स्तर पर अभियान चलाकर नागरिकों को हेलमेट न पहनने के जोखिमों के प्रति जागरूक किया जाए, विशेषकर पीछे बैठने वाले यात्रियों को, जिनकी सुरक्षा अक्सर नजरअंदाज हो जाती है।

सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दोपहिया दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का बड़ा कारण सिर में गंभीर चोटें हैं, जिनमें हेलमेट का उपयोग न करना प्रमुख कारक के रूप में सामने आता है। परिवहन विभाग की यह पहल इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विभाग ने सभी जिलों में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस कड़े प्रवर्तन और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयास से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों में उल्लेखनीय कमी आएगी।