Home छत्तीसगढ़ प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान अपनी बढ़ाएं आय और बचाएं मिट्टी की उर्वरता-...

प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान अपनी बढ़ाएं आय और बचाएं मिट्टी की उर्वरता- मंत्री श्री केदार कश्यप

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003

प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचारों की लगी प्रदर्शनी

एक दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं कृषि प्रदर्शनी के अवसर पर कृषि, उद्यानिकी, पशुधन विकास, मत्स्य, रेशम विभाग, कृषि महाविद्यालय तथा अन्य संस्थाओं द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि नवाचार और आजीविका संवर्धन से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर किसानों से संवाद किया और नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

किसानों को मिला उन्नत बीज और कृषि सामग्री का लाभ

कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने किसानों को हल्दी की उन्नत किस्म के प्रकंद, रागी बीज एवं प्राकृतिक खेती में उपयोगी सामग्री का वितरण किया।

प्रगतिशील किसानों का हुआ सम्मान

जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाले प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया। मिलियनेयर कृषक अवार्ड से सम्मानित श्री चैतूराम यादव एवं श्री नीलकंठ नाग, बेस्ट फार्मर इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम अवार्ड प्राप्त श्री सुरेन्द्र नाग तथा राज्यपाल सम्मान से सम्मानित श्रीमती गीता नाग को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील

मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण करने और खेती की लागत कम करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट प्रबंधन तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल देते हुए किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण है अभियान का मुख्य उद्देश्य

कलेक्टर सुश्री नम्रता जैन ने बताया कि खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में योगदान देने की अपील की।

विशेषज्ञों ने दी प्राकृतिक खेती की तकनीकी जानकारी

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्न्यास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि उत्पादों के निर्माण एवं उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती के आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लाभों से भी अवगत कराया गया।

कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की पहल

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कृषकों, जनप्रतिनिधियों, कृषि वैज्ञानिकों, छात्र-छात्राओं एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास ने सभी अतिथियों और किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करने, कृषि लागत कम करने, आय बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here