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अब मानसून काटेगा गदर! 85KM की रफ्तार से आंधी-तूफान; 15 राज्यों में मूसलाधार बारिश पर IMD का अलर्ट

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देशभर में मानसून अब पूरी ताकत के साथ आ चुका है. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर मायानगरी मुंबई तक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई है. जून के आखिरी दिनों तक जिन इलाकों में लोग गर्मी और उमस से बेहाल थे, वहां अब बादलों ने डेरा डाल दिया है. मौसम विभाग (IMD) का ताजा पूर्वानुमान बताता है कि अगले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका है. ऐसे में शहरों में जलभराव, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ने और पेड़ गिरने जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. IMD का कहना है कि इस बार एक साथ सक्रिय कई वेदर सिस्टम मानसून को अतिरिक्त मजबूती दे रहे हैं. इसलिए यह सामान्य बारिश नहीं, बल्कि कई राज्यों में हाई इम्पैक्ट वेदर इवेंट साबित हो सकती है.
दिल्ली से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में मौसम तेजी से करवट ले रहा है. बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र, उत्तर ओडिशा तट के पास सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन, दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक बनी ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ मिलकर मानसून को लगातार मजबूत बना रहे हैं. मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में यह सिस्टम और सक्रिय होगा, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का दायरा और बढ़ जाएगा. कई इलाकों में तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, लेकिन इसके साथ तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा भी रहेगा. इसलिए राहत के साथ सतर्कता भी जरूरी होगी.

देशभर में मानसून की उत्तरी सीमा अब दिल्ली, पूरे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों तक पहुंच चुकी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में मानसून उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा. इसका असर खेती-किसानी पर सकारात्मक पड़ सकता है, लेकिन जिन शहरों में ड्रेनेज व्यवस्था कमजोर है वहां जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
इस बार मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई वेदर सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर एरिया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके साथ मानसूनी ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हैं. इन सभी के संयुक्त प्रभाव से कई राज्यों में एक ही समय पर तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. यही वजह है कि मौसम विभाग ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.

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