बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय कार्यक्रम “हमर पहुना” में गुरुवार को बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राघवेंद्र राव सभा भवन स्थित प्रेस क्लब में आयोजित इस आत्मीय संवाद में उन्होंने पत्रकारों के प्रश्नों का खुलकर जवाब दिया। बचपन की यादों से लेकर पुलिस सेवा में आने की प्रेरणा, कठिन अभियानों, आधुनिक पुलिसिंग, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, पुलिसकर्मियों के कल्याण और बिलासपुर की कानून-व्यवस्था तक अनेक विषयों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में एसएसपी ने कहा कि बिलासपुर प्रेस क्लब का बदला हुआ स्वरूप देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि क्लब की नई इमारत और सक्रिय माहौल यह दर्शाता है कि पत्रकारों की मेहनत और समर्पण से प्रेस क्लब नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रेस क्लब की पूरी कार्यकारिणी और सभी पत्रकार साथियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
अपने बचपन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश में हुई।ग्वालियर के गोरखी स्कूल की बाउंड्री एसपी कार्यालय से लगी हुई थी। बचपन में वे अपने दोस्तों के साथ एसपी की गाड़ी और पुलिस अधिकारियों को देखने दौड़ जाया करते थे। उस समय डकैतों के आत्मसमर्पण जैसी घटनाओं को करीब से देखने का अवसर मिला, जिसने उनके मन में पुलिस सेवा के प्रति आकर्षण पैदा किया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली ने भी उन्हें प्रभावित किया। रायपुर के साइंस कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और पुलिस सेवा में चयनित हुए। पहली नियुक्ति बस्तर में हुई, जिसके बाद कोंडागांव, रायपुर, इंटेलिजेंस, एंटी करप्शन सहित अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
उन्होंने कहा कि बचपन में पुलिस की वर्दी और लालबत्ती आकर्षण का केंद्र थी, लेकिन प्रशिक्षण शुरू होने के पहले दिन ही समझ में आ गया कि पुलिस सेवा का वास्तविक आधार अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा है। वर्दी केवल पहचान देती है, सम्मान जनता का विश्वास दिलाता है।
आधुनिक पुलिसिंग पर अपने विचार रखते हुए एसएसपी ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग का अर्थ केवल तकनीक नहीं है। पुलिस की विश्वसनीयता, प्रभावी विवेचना, अपराधों का सफल खुलासा, जनता से बेहतर संवाद, कम्युनिटी पुलिसिंग और मैदान में पुलिस की दृश्यमान उपस्थिति ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर पुलिस इन सभी बिंदुओं पर लगातार काम कर रही है और मीडिया तथा आम जनता से मिलने वाली सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
त्योहारों की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष में होली, दीपावली और अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान नई रणनीति अपनाई गई। पहले जहाँ छोटी-छोटी पुलिस टुकड़ियाँ तैनात रहती थीं, वहीं अब प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान तैनात किए जाते हैं। इससे पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ी और कानून-व्यवस्था मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष होली के दौरान महिलाओं और युवतियों का निर्भय होकर शहर में घूमना उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि का विषय था।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी भीड़ में कोई व्यक्ति कानून हाथ में लेने का प्रयास करता है तो उसे तत्काल चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाती है। इसी प्रकार यदि कोई पुलिसकर्मी भी वर्दी का दुरुपयोग करता है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए जाते हैं। कानून सबके लिए समान है।
संसाधन प्रबंधन पर बोलते हुए एसएसपी ने कहा कि पुलिस की सफलता केवल बल की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके बेहतर प्रबंधन पर निर्भर करती है। बिलासपुर में उपलब्ध सरकारी वाहनों का पुनर्गठन किया गया, निजी वाहनों पर निर्भरता कम की गई और बीट सिस्टम को मजबूत बनाया गया। इससे लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की बचत हुई। शीघ्र ही 36 नए वाहन मिलने के बाद प्रत्येक बीट पुलिसकर्मी को वाहन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग को ट्रक, जेसीबी, हाइड्रा और तीन नई एंबुलेंस भी मिली हैं, जिससे दुर्घटनाओं में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एटीएस में रहते हुए उनकी टीम ने पटना बम विस्फोट के आरोपियों को गिरफ्तार किया। दुर्ग में पदस्थ रहते हुए 16 डकैतियों का खुलासा किया गया। मध्यप्रदेश के जंगलों में पारदी गिरोह के विरुद्ध चलाया गया अभियान आज भी उनके लिए यादगार है। उन्होंने कहा कि पुलिस की हर सफलता पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम होती है।
पुलिस परिवार के कल्याण को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि 112 नए पुलिस आवास स्वीकृत कराए गए हैं। यात्रा भत्ता, मेडिकल रीइम्बर्समेंट, कैशलेस उपचार, पुलिस अस्पताल, आधुनिक स्कूल और पुलिस कैंटीन जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है ताकि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को अधिक सुविधाएँ मिल सकें।
तनावपूर्ण सेवा के बारे में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी को परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को मानसिक रूप से संतुलित रखना सीखना पड़ता है। नियमित दिनचर्या, आत्मसंयम और सकारात्मक सोच कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में मदद करती है।
शहर में लगाए जा रहे नए सीसीटीवी कैमरों पर उन्होंने बताया कि सभी थाना क्षेत्रों के अपराध संभावित इलाकों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि शहर का कोई भी संवेदनशील क्षेत्र निगरानी से बाहर न रहे और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
कार्यक्रम के अंत में एसएसपी रजनेश कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी पहचान उसकी वर्दी नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। यदि पुलिस निष्पक्ष, संवेदनशील और पारदर्शी ढंग से कार्य करे तो समाज में सुरक्षा और भरोसे का वातावरण स्वतः बनता है। उन्होंने बिलासपुर प्रेस क्लब के आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और पुलिस तथा मीडिया के बेहतर समन्वय से समाज को अधिक सुरक्षित और जागरूक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। संवाद के दौरान पत्रकारों ने कानून-व्यवस्था, पुलिस सुधार, अपराध नियंत्रण, संसाधन प्रबंधन और पुलिस कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका एसएसपी ने बेबाकी और विस्तार से उत्तर दिया। आत्मीय वातावरण में संपन्न यह संवाद पत्रकारों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी साबित हुआ।



