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समुद्र के नीचे खुदाई और 17 बड़े पुल तैयार; जानिए कितनी बदल गई आपकी बुलेट ट्रेन और कब तक होगा सफर शुरू

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भारत और जापान के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसने देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विजन को एक नई रफ्तार दी है. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई. जापान की प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उनका देश भारत के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग जारी रखेगा. दोनों नेताओं ने इस प्रोजेक्ट में अगली पीढ़ी की E10 शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक को शामिल करने का भी स्वागत किया.
इस बैठक के दौरान भारत के भावी 7,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को लेकर भी चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भविष्य के नए रेल कॉरिडोर और जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया है. दोनों देशों ने ‘नेक्स्ट-जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप’ (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भविष्य में दोनों देशों के निजी क्षेत्रों की भागीदारी को बढ़ाएगा. जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि वे भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरी तरह समझती हैं और इसके समय पर क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं.

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर है. यह कुल 508 किलोमीटर लंबा ट्रैक है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरेगा. इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें मुंबई (बीकेसी), ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं. जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू हो जाएगा, तो मुंबई से अहमदाबाद के बीच का सफर, जिसमें अभी रेल या सड़क मार्ग से 8 से 9 घंटे लगते हैं, घटकर मात्र 2 घंटे रह जाएगा. इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.
15 अगस्त से परिचालन शुरू
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए देश की पहली बुलेट ट्रेन की लॉन्चिंग को लेकर बेहद अहम जानकारी साझा की है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि भारत में पहली बुलेट ट्रेन का व्यावसायिक संचालन 15 अगस्त 2027 को शुरू होने की पूरी संभावना है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रोजेक्ट की चरणबद्ध टाइमलाइन को स्पष्ट करते हुए बताया:
पहला फेज (अगस्त 2027): गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच 47 किलोमीटर लंबे प्राथमिक सेक्शन (Priority Section) पर देश की पहली बुलेट ट्रेन शुरू की जाएगी. इसके तुरंत बाद वापी से सूरत के सेक्शन को खोला जाएगा.
विस्तार (2028-2029): साल 2028 तक इस सेवा का विस्तार ठाणे तक कर दिया जाएगा और साल 2029 तक बुलेट ट्रेन मुंबई तक पहुंच जाएगी.
पूरा प्रोजेक्ट (दिसंबर 2029/2030): रेल मंत्रालय का लक्ष्य है कि दिसंबर 2029 से लेकर 2030 की शुरुआत तक इस पूरे 508 किलोमीटर के कॉरिडोर को आम जनता के लिए पूरी तरह चालू कर दिया जाए.
अब तक कितना पूरा हुआ काम?
मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने निर्माण के मामले में अभूतपूर्व गति पकड़ी है. गुजरात और महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का काम 100% पूरा हो चुका है और सभी वैधानिक मंजूरियां ली जा चुकी हैं.
पिलर और वायाडक्ट: पूरे रूट पर अब तक 450 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का पिलर (Pier) निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 354 किलोमीटर से अधिक के वायाडक्ट (ब्रिज का ऊपरी हिस्सा) का ढांचा तैयार किया जा चुका है.
स्टेशन और पुल: गुजरात के सभी 8 स्टेशनों (वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती) पर फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है और सुपरस्ट्रक्चर का काम एडवांस स्टेज में है. इसके अलावा रूट पर पड़ने वाली विभिन्न नदियों पर बने 17 बड़े पुल पूरी तरह तैयार हो चुके हैं.
अंडर-सी और माउंटेन टनल: इस प्रोजेक्ट में 4 पहाड़ी सुरंगों का काम पूरा हो चुका है. वहीं महाराष्ट्र के हिस्से में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन पर 91% खुदाई पूरी हो चुकी है और भारत की पहली 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी (समुद्र के नीचे) सुरंग का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें से घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर की टनलिंग पूरी की जा चुकी है.

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