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THAAD और आयरन डोम भी नहीं आ रहा काम, ईरान का सूरमा बना रहा चूरमा, अब तो जवानों को भी नहीं बचा पा रहा अमेरिका

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ईरान लगातार खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. शनिवार को जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. इन लगातार हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर अमेरिका के THAAD, आयरन डोम और एरो जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के बावजूद ईरान बार-बार अपने हमलों में कैसे सफल हो रहा है. इसके पीछे ईरान की नई मिसाइल टेक्नोलॉजी और रूस-चीन से मिल रही कथित सैन्य सहायता है. ईरान ने आधिकारिक तौर पर दो हाइपरसोनिक मिसाइलों का दावा किया है- फतह-1 (Fattah-1) और फतह-2 (Fattah-2). हालांकि इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है कि ईरान इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं.

ईरान के पास कौन सी मिसाइलें हैं?

  • फतह-1 मिसाइल जून 2023 में पहली बार सार्वजनिक की गई. इस मिसाइल की रेंज लगभग 1,400 किलोमीटर बताई जाती है. ईरान का दावा है कि यह Mach 13 से Mach 15 तक की स्पीड से उड़ सकती है और एकदम आखिर में दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है.
  • फतह-2 मिसाइल की बात करें तो इसे नवंबर 2023 में दुनिया के सामने रखा गया था. फतह-2 की रेंज करीब 1,400 से 1,500 किलोमीटर बताई जाती है. ईरान का दावा है कि इसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक जटिल उड़ान भर सकती है.

एयर डिफेंस को कैसे चकमा देती हैं ये मिसाइलें?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह हाइपरसोनिक स्पीड और मैन्यूवर करने की क्षमता है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय रास्ते पर उड़ती हैं, इसलिए रडार पहले ही उनके संभावित लक्ष्य का अनुमान लगा लेते हैं. लेकिन यदि कोई मिसाइल Mach 5 या उससे अधिक की गति से उड़ते हुए अंतिम समय में दिशा बदल दे, तो एयर डिफेंस सिस्टम के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ सेकंड ही बचते हैं. जब तक रडार नई दिशा को ट्रैक करता है, मिसाइल फिर अपना रास्ता बदल सकती है. इतना ही नहीं, इजरायल ने क्योंकि जिस तरह से खुद को मिसाइल से बचाने के लिए एयर डिफेंस लगाया है, उस लेवल की सुरक्षा गल्फ के बाकी देशों में नहीं है.

रूस की मदद मिल रही?

मार्च 2026 में प्रकाशित वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान को सैटेलाइट इमेजरी और एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रहा है, जिससे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की बेहतर पहचान और टारगेटिंग संभव हो रही है. मार्च में कार्नेगी एंडाउमेंट की रूसी सैन्य विशेषज्ञ दारा मासीकोट ने कहा था, ईरान के पास अपने सैन्य उपग्रह सीमित हैं, इसलिए रूसी सैटेलाइट इमेजरी उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी दावा किया था कि मार्च के अंत में केवल 10 दिनों के अंदर रूसी सैटेलाइट्स ने 11 देशों में 46 सैन्य ठिकानों की तस्वीरें लीं. इनमें डिएगो गार्सिया, कुवैत एयरपोर्ट, सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयरबेस और कतर का अल उदेद एयरबेस जैसे प्रमुख अमेरिकी ठिकाने शामिल थे. रूस इसलिए मदद देता है क्योंकि उसे यूक्रेन युद्ध में ईरान से ड्रोन मिल रहे हैं. वहीं जितना अमेरिका ईरान के खिलाफ फंसा रहेगा, उतना ही वह यूक्रेन पर कम ध्यान देगा.

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