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आजीविका डबरियों और नवा तरिया में मत्स्य पालन से बढ़ेंगे ग्रामीण आय के अवसर

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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी अभिसरण किया जा रहा है। इसी क्रम में सरगुजा जिले के विकासखंड अम्बिकापुर में वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियों एवं नवा तरिया को मत्स्य पालन से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत 28 ग्राम पंचायतों की 35 आजीविका डबरियों और 2 नवा तरिया में लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन किया गया है।

शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, दरिमा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 45 गांवों के 50 हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर फिंगरलिंग मछली बीज उपलब्ध कराया गया। हितग्राहियों द्वारा इन बीजों का अपनी आजीविका डबरियों एवं नवा तरिया में संचयन किया जाएगा। इससे जल संरचनाओं का उपयोग जल संरक्षण के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन और आय सृजन के लिए भी किया जा सकेगा।

जल संरचनाएं बन रहीं आय का नया आधार

वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से निर्मित आजीविका डबरियों और नवा तरिया को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इनमें मत्स्य पालन शुरू होने से ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

मत्स्य पालन के लिए अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध कराने से हितग्राहियों पर शुरुआती लागत का भार कम होगा और अधिक ग्रामीण परिवार इस गतिविधि से जुड़ सकेंगे। आने वाले समय में इन जल संरचनाओं से मत्स्य उत्पादन बढ़ने पर हितग्राहियों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।

योजनाओं के अभिसरण से ग्रामीण विकास को नई दिशा

जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को विभिन्न विभागों की गतिविधियों के साथ जोड़कर उनके बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं। आजीविका डबरी एवं नवा तरिया का निर्माण जहां जल संरक्षण और ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा दे रहा है, वहीं मत्स्य विभाग के सहयोग से इन्हीं संरचनाओं में मत्स्य पालन शुरू होने से यह ग्रामीण परिवारों के लिए आय का साधन बन रही हैं।

हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन

मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को मछली बीज संचयन, मत्स्य पालन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन से संबंधित आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। हितग्राहियों को वैज्ञानिक एवं बेहतर मत्स्य पालन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उपलब्ध जल संरचनाओं से अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज के संचयन से 45 गांवों के 50 हितग्राही सीधे लाभान्वित होंगे। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को आय संवर्धन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आजीविका डबरियां और नवा तरिया अब केवल जल संरचनाएं नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए मत्स्य पालन, रोजगार और अतिरिक्त आय के नए केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

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