Home छत्तीसगढ़ हथियार छोड़ अपनाया हुनर, पुनर्वास नीति से बदली रानू राम की जिंदगी

हथियार छोड़ अपनाया हुनर, पुनर्वास नीति से बदली रानू राम की जिंदगी

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रायपुर : हथियार छोड़ अपनाया हुनर, पुनर्वास नीति से बदली रानू राम की जिंदगी

 

 

 

 

 

शासन की योजनाओं का लाभ लेकर खेती-किसानी को भी बेहतर बनाने की तैयारी

रायपुर, 8 सितंबर 2026

कभी माओवादी संगठन से जुड़े ग्राम ठोटी मड़ानार पंचायत मुँगवाल निवासी रानू राम नेताम ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और सामान्य जीवन की राह अपना ली है। केंद्र और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर रानू राम ने माओवादी संगठन से आत्मसमर्पण किया। इसके बाद शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सुरक्षित वातावरण में रहते हुए अपनी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला।

’आत्मसमर्पण के बाद भविष्य को संवारने के लिए प्रशिक्षण आवश्यक’

आत्मसमर्पण के बाद रानू राम नेताम पुनर्वास केंद्र में रहकर अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे। इसी दौरान उन्होंने लाइवलीहुड कॉलेज में ड्राइविंग का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने वाहन चलाने की बारीकियां सीखीं और सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया। रानू राम बताते हैं कि अब वे पूरी तरह से गाड़ी चलाना सीख चुके हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इसके बाद रानू राम को सिक्योरिटी गार्ड के रूप में रोजगार का अवसर मिला और वर्तमान में वे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे हैं। वे बताते हैं कि यह नौकरी उनके जीवन में एक नया बदलाव लेकर आई है। नियमित रोजगार मिलने से उन्हें अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में मदद मिल रही है और भविष्य को लेकर उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। रानू राम कहते हैं कि उनकी ड्यूटी रात के समय रहती है। इसलिए दिन में वे अपने घर जाते हैं और परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ घर के कामकाज में भी हाथ बंटाते हैं। नौकरी के साथ अपने परिवार और घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे अब एक सामान्य और बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

’सोलर पंप लगने से रानू राम को खेती-किसानी के लिए सिंचाई की सुविधा मिली’

रानू राम के जीवन में बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं। उनके घर में पहले से ट्यूबवेल था, लेकिन सिंचाई के लिए बिजली और अन्य संसाधनों की आवश्यकता रहती थी। इसी दौरान उन्हें शासन द्वारा किसानों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे सौर पंप की योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और अब उनके घर के ट्यूबवेल में सोलर पंप स्थापित हो चुका है।

सोलर पंप लगने से रानू राम को खेती-किसानी के लिए सिंचाई की सुविधा मिली है। वे अब अपनी जमीन पर बेहतर तरीके से खेती करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि नौकरी के साथ-साथ वे खेती को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि परिवार की आय के अतिरिक्त साधन विकसित हो सकें और भविष्य अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

’शासन की योजनाओं और मिले अवसरों ने रानू राम को नई दिशा दी’

रानू राम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास के बाद माओवादी संगठन से जुड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर दिए जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास के लिए बनाई गई विशेष नीति के तहत उन्हें सुरक्षित जीवन, कौशल विकास, प्रशिक्षण, रोजगार और शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

रानू राम के जीवन में आया यह परिवर्तन बताता है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलने पर व्यक्ति अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई शुरुआत कर सकता है। आज रानू राम आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। एक ओर वे सिक्योरिटी गार्ड के रूप में नौकरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोलर पंप की सुविधा से खेती को बेहतर बनाने की तैयारी में जुटे हैं।

हिंसा से विकास की ओर बढ़े रानू राम अब अपने परिवार के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य का सपना देख रहे हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं और मिले अवसरों ने उन्हें नई दिशा दी है। वे चाहते हैं कि आने वाले समय में वे अपनी खेती को और विकसित करें तथा मेहनत और रोजगार के माध्यम से अपने परिवार का जीवन स्तर बेहतर बनाएं।