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गौपालन बना मधुसुदन भगत की मजबूत आय का साधन

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रायपुर : गौपालन बना मधुसुदन भगत की मजबूत आय का साधन

 

 

 

 

 

27 गायों से प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन, स्थानीय बाजार में होती है पूरी खपत

रायपुर, 9 सितंबर 2026

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों को कृषि के साथ-साथ पशुपालन जैसी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के स्थायी और बेहतर साधन विकसित किए जा रहे हैं। शासन के प्रयासों और विभागीय सहयोग से प्रदेश के अनेक किसान गौपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के किसान श्री मधुसुदन भगत ऐसे ही प्रगतिशील पशुपालक हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, अनुभव और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के जरिए गौपालन को अपनी मजबूत आय का साधन बनाया है।

श्री मधुसुदन भगत वर्ष 2005 से बड़े स्तर पर गौपालन कर रहे हैं। वर्तमान में उनके पास 27 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 60 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है। उनके द्वारा उत्पादित दूध की स्थानीय स्तर पर ही पूरी खपत हो जाती है। इससे उन्हें नियमित और अच्छी आय प्राप्त हो रही है।

श्री भगत के गौपालन में जर्सी नस्ल के साथ स्थानीय एवं मिश्रित नस्ल की गायें भी शामिल हैं। वे पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष देखभाल करते हैं। बगीचा स्थित पशु चिकित्सालय के माध्यम से वे अपने पशुओं का नियमित उपचार एवं टीकाकरण करवाते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी से उन्हें बेहतर दुग्ध उत्पादन में मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि उनकी गायें सुबह और शाम नियमित रूप से दूध देती हैं। पशुओं के पोषण का भी वे विशेष ध्यान रखते हैं। गायों के आहार में मक्के के चूरे का उपयोग किया जाता है, जिसे खौलते पानी में पकाकर पशुओं को खिलाया जाता है। उनका अनुभव है कि पौष्टिक आहार से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है।

गौपालन से निकलने वाले गोबर का भी श्री भगत बेहतर उपयोग कर रहे हैं। प्रतिदिन दो बार गोबर एकत्रित कर उसे वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में उपयोग किया जाता है। तैयार जैविक खाद का उपयोग वे अपने खेतों में करते हैं। इससे खेती की लागत कम करने और खेतों की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।

श्री मधुसुदन भगत का कहना है कि गौपालन में नियमित देखभाल, संतुलित आहार, पशुओं का समय पर टीकाकरण और विभागीय मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। वर्षों के अनुभव से उन्होंने पशुपालन की बारीकियों को समझा है और इसी का परिणाम है कि आज गौपालन उनके परिवार के लिए नियमित एवं मजबूत आय का माध्यम बन गया है।

मधुसुदन भगत की सफलता यह संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक, सही पशु प्रबंधन, मेहनत और विभागीय सहयोग को अपनाकर गौपालन किसानों के लिए कृषि के साथ-साथ स्थायी एवं बेहतर आय का प्रभावी साधन बन सकता है।