Home छत्तीसगढ़ बस्तर के वनकोमार में ‘अमृत सरोवर’ ने बदली तस्वीर

बस्तर के वनकोमार में ‘अमृत सरोवर’ ने बदली तस्वीर

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रायपुर : बस्तर के वनकोमार में ‘अमृत सरोवर’ ने बदली तस्वीर

 

 

 

 

 

जल संकट से मुक्ति के साथ ग्रामीणों को मिला आजीविका का नया सहारा

रायपुर, 23 सितम्बर 2026

जल संरक्षण और ग्रामीण स्वावलंबन की दिशा में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले ने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। बस्तर जिले के जनपद पंचायत बकावंड के ग्राम पंचायत वनकोमार स्थित गोहनामुण्डा क्षेत्र में ‘मिशन अमृत सरोवर’ के तहत निर्मित नवीन तालाब आज ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। कभी यह क्षेत्र भीषण जल संकट की मार झेल रहा था, जहाँ वर्षा जल संचयन की उचित व्यवस्था न होने से कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर अत्यधिक गिर जाता था तथा कृषि एवं मवेशियों के लिए पानी की भारी किल्लत बनी रहती थी। इस स्थायी समस्या के समाधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देने के उद्देश्य से यहाँ अमृत सरोवर निर्माण की योजना तैयार की गई थी।

ग्राम पंचायत वनकोमार द्वारा क्रियान्वित इस परियोजना ने समयबद्धता और लागत प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत स्वीकृत 20 लाख रूपए की लागत वाली इस योजना को मात्र 16 लाख रूपए के वास्तविक व्यय से 13 मई 2025 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें गाँव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही सरोवर के तटबंधों को सुदृढ़ बनाकर परिसर में छायादार एवं फलदार पौधे लगाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और परिसर का सौंदर्गीकरण भी सुनिश्चित हुआ।

आज लबालब भरा यह सरोवर केवल वर्षा जल के विशाल संचयन और भूजल स्तर को रिचार्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मत्स्यपालन विभाग के सहयोग से सरोवर में रोहू, कतला और मृगल जैसी उन्नत प्रजातियों का मत्स्य बीज डालकर वैज्ञानिक पद्धति से मछलीपालन प्रारंभ किया गया है। इससे ग्राम पंचायत एवं महिला स्व-सहायता समूह को निरंतर अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और स्थानीय स्तर पर टिकाऊ रोजगार मिलने से ग्रामीणों के मौसमी पलायन पर भी प्रभावी विराम लगा है। समीपस्थ कृषि भूमि में नमी बने रहने और सिंचाई सुविधा सुलभ होने से कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिली है, जिससे कभी उपेक्षित और बंजर दिखने वाला यह क्षेत्र आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक समृद्धि की नई इबारत लिख रहा है।