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जनजातीय क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित

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रायपुर : जनजातीय क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित

 

 

 

 

 

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026

 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संचालनालय अनुसंधान सेवाएँ में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषदद-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईओआर), हैदराबाद के सहयोग से “छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादकता एवं आजीविका बढ़ाने हेतु तिलहन उत्पादन प्रौद्योगिकियों का प्रोत्साहन” विषय पर जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 40 से अधिक किसानों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यशाला में तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, उन्नत किस्मों एवं गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, खरपतवार प्रबंधन तथा कृषि यंत्रीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर किसानों को नाइजर (रामतिल), सूरजमुखी, कुसुम, तिल, अलसी एवं सरसों के बीज तथा अन्य कृषि आदान वितरित किए गए।

कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक ने बेमेतरा में अलसी के डंठल से धागा एवं कपड़ा बनाने की प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रौद्योगिकी किसानों की आमदनी बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध हो सकती है। अलसी के डंठल का उपयोग कर धागा एवं कपड़ा बनाने की यह पहल कृषि अवशेषों के मूल्यवर्धन तथा किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के निदेशक डॉ. आर. के. माथुर, जनजातीय उप-योजना कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. जी. सुरेश, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान सेवाएँ डॉ. विवेक त्रिपाठी तथा विभिन्न केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील जनजातीय किसानों ने सहभागिता की। माननीय कुलपति ने तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देते हुए भारत को तिलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों एवं वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने तिलहन फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे बस्तर अंचल, सरगुजा अंचल एवं मैदानी क्षेत्रों से आए जनजातीय कृषकों को तिलहन फसलों की विविधता, उनकी खेती तथा संबंधित उत्पादन प्रौद्योगिकियों से परिचित कराया गया। इसके अतिरिक्त, किसानों को रायपुर में तिलहन फसलों की विविधता एवं प्रसंस्करण से संबंधित प्रदर्शनों का अवलोकन कराया गया, जिससे उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। डॉ. संजय के. द्विवेदी, प्रमुख वैज्ञानिक, अखिल भारतीय समन्वित अलसी अनुसंधान परियोजना ने तिलहन फसलों से संबंधित जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों का अवलोकन प्रस्तुत किया। अन्य वक्ताओं ने गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता, खेत-स्तरीय प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण, वैज्ञानिक मार्गदर्शन, उचित भंडारण, प्रसंस्करण तथा बाजार से बेहतर जुड़ाव पर विशेष बल दिया। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करना तथा उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाना था। इस कार्यशाला के माध्यम से वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करते हुए जनजातीय क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने, कृषि आधारित आजीविका के नए अवसर विकसित करने तथा किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।