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अगर पटाखों से तुलना करें तो लगता है कि वाहनों से कहीं अधिक प्रदूषण होता है: न्यायालय

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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल किया कि लोग पटाखा उद्योग के पीछे क्यों पड़े हैं जबकि ऐसा लगता है कि इसके लिए वाहन प्रदूषण कहीं अधिक बड़ा स्रोत हैं। शीर्ष अदालत ने केन्द्र से जानना चाहा कि क्या उसने पटाखों और आटोमोबाइल से होने वाले प्रदूषण के बीच कोई आनुपातिक अध्ययन कराया है।

पीठ ने टिप्पणी की कि पटाखा उद्योग में कार्यरत लोगों का रोजगार चला गया जबकि न्यायालय बेरोजगारी बढ़ाना नहीं चाहता है। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने केन्द्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से जानना चाहा, क्या पटाखों से होने वाले प्रदूषण और आटोमोबाइल से होने वाले प्रदूषण के बारे में कोई तुलनात्मक अध्ययन किया गया है?

ऐसा लगता है कि आप पटाखों के पीछे भाग रहे हैं जबकि प्रदूषण में इससे कहीं अधिक योगदान करने वाले शायद वाहन हैं। पीठ ने देश भर में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दलील दी गई है कि इनकी वजह से प्रदूषण में वृद्धि होती है।

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