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मैली रही गंगा, लेकिन इससे जुड़े विज्ञापन पर मोदी सरकार ने ख़र्च किए करोड़ों रुपये

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने कार्यकाल में एक और महत्व कौन सी योजना रही बहती गंगा की सफाई अब गंगा कितनी साफ हुई कितनी मैली इसका लेखा-जोखा सामने आया है एनजीटी ने इसे लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगाते रहते हैं लेकिन एक चीज विनाशक और लगातार चमकदार होती चली गई. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा लेकिन हमारी गंगा उसी जगह पर है जहां पर वह 2014 से पहले हुआ करती थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में नामांकन दाखिल करने के बाद कहा था कि उन्हें मां गंगे ने बुलाया था और उन्होंने गंगा को अपना महा बताते हुए उसे अपना बेटा बताया था उसके बाद उन्होंने इसके लिए कलेक्शन मंत्रालय भी बनाया और हजारों करोड़ रुपए इस मंत्रालय को भी दिए है, लेकिन इसकी सच्चाई यह है कि जितना पैसा गंगा की सफाई में खर्च नहीं हुआ है उससे ज्यादा पैसा मोदी सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च कर दिया गया है.

5 साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में गंगा के मंत्रालय बदल गए पहले यह मंत्रालय उमा भारती के पास था जिन्होंने 2019 तक गंगा की सफाई करने की बात कही थी लेकिन चुनाव आते-आते जब उन्हें लगा कि वह गंगा की सफाई नहीं कर सकती तो मंत्रालय बीच समय में बदल दिया गया और यह मंत्रालय अब नितिन गडकरी के पास है जो अब गंगा की सफाई को लेकर अपना लक्ष्य 2022 से 2024 तक ले जा चुके हैं.

वैसे तो नितिन गडकरी के लिए अक्सर कहा जाता है कि वह एक ऐसे नेता है जो अपना टारगेट पूरा कर लेते हैं और अपना नेता ऐसा नेता है और ऐसे मंत्री हैं जो अपने कार्य कर लेते हैं लेकिन गंगा के मामले में मोदी सरकार के साथ-साथ नितिन गडकरी भी फेल नजर आए हैं और वह भी गंगा को साफ करने में कुछ खास कार्य नहीं कर सके.