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छत्तीसगढ़ : 350 मासूमों से मंगा रहे थे भीख, विभाग ने छापा मारा तो हुआ ऐसा खुलासा

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तिल्दा नगर की तीन नट बस्तियों के 380 परिवारों के लगभग साढ़े तीन सौ बच्चे बसों और ट्रेनों में भिक्षावृत्ति करते हैं। इसे संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार की सुबह महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने तिल्दा के अटल निवास, देवार मोहल्ला और शिक्षा कॉलोनी में छापा मारा तो वहां हड़कंप मच गया।

अधिकारियों की टीम के अचानक आने से वे घबरा गए। उनके दरवाजे पर टीम के साथ सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने दस्तक दी तो वे एकजुट होकर विरोध पर उतारू हो गए। पुलिस ने उन्हें अपने बच्चों के साथ एक जगह एकत्रित किया। इसके बाद नट और देवार बस्ती के लोगों को समझाइश देने का सिलसिला चला।

इस पर उन्होंने बताया-हमारे सामने सबसे बड़ी परेशानी गृहस्थी चलाने की है। न तो राशन कार्ड है और न ही श्रमिक कार्ड है। ऐसे में चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। इनकी समस्या सुनने के बाद अफसरों ने कहा-बच्चों से भिक्षावृत्ति न कराएं, अभी प्राथमिक स्तर पर आंगनबाड़ी में दाखिला कराएं।

इसके बाद राशनकार्ड और श्रमिक कार्ड बनवाया जाएगा। स्वरोजगार करने के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। हर एक सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके बाद वे मान गए और खुद आंगनबाड़ी जाकर 80 बच्चों का दाखिला कराया।

बस्ती की महिलाएं और पुरुष मिले नशे में

बस्ती में टीम पहुंची तो अधिकतर महिला-पुरुष नशे में मिले। उन्हें अपने बच्चों के कहीं भी आने-जाने की सुध नहीं। इन्हीं लोगों में एक सिंडीकेट है, जो कुछ पैसे और नशा करने का साधन उपलब्ध कराने के नाम पर बच्चों को भिक्षावृत्ति के लिए ले जाता है। शाम तक बच्चों को लाकर घर छोड़ देता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी नवनीत स्वर्णकार के नेतृत्व अधिकारियों ने बस्ती के लोगों को समझाइश दी।

बच्चे के गुम होने की खबर भी नहीं

नट बच्चों का भिक्षावृत्ति में इस कदर इस्तेमाल होने लगा है कि कई परिवारों के बच्चे गुम हो गए, लेकिन उनकी भी चिंता नहीं है। अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मासूमों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।

स्थानीय पुलिस करेगी बच्चों की मॉनिटरिंग

प्रशासन ने नट बच्चों के बाहर आने-जाने की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी दी है। अब वे अपने बच्चों को अगर बस या ट्रेन में ले जाकर छोड़ते हैं तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दोबारा भीख मंगवाने पर बच्चों को बाल आश्रम भेजेगा प्रशासन

दोबारा फिर बच्चों से भीख मंगवाने पर बच्चों को बाल आश्रम भेज दिया जाएगा। वहां माता-पिता को बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा। नट बस्ती के लोगों को प्रशासन ने यह चेतावनी दी है। बाल अश्रम में बच्चों रहने, खाने-पीने के साथ पढ़ाई आदि की व्यवस्था की जाएगी। बस्ती के लोगों ने शपथ ली है कि वे बच्चों से भीख नहीं मंगवाएंगे।

बनेंगे इनके राशन कार्ड और श्रमिक कार्ड, उपलब्ध कराएंगे रोजगार

नट और देवार बस्ती के लोगों की माली हालत सुधारने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम जिला बाल संरक्षण समिति में इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इन बस्तियों के लोगों के राशनकार्ड और श्रमिक कार्ड बनाने के लिए प्रस्ताव दिए जाएंगे। इनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए एनजीओ की भी मदद ली जाएगी।

– बच्चों को अभी आंगनबाड़ी में दाखिल करा दिया गया है। आगे भी इनकी पढ़ाई की मॉनिटरिंग की जाएगी। नट बस्ती में जांच करने पर पता चला कि ये यहां पिछले 20 सालों से हैं, लेकिन अभी तक इनका राशनकार्ड नहीं है न ही श्रमिक कार्ड बना है। यह सब बनवाया जाएगा। इनकी बराबर मॉनिटरिंग की जाएगी। – अशोक पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग