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सामने में ही मरते देखा अपने साथियों को, बांस के सहारे 5 दिनों तक बिना कुछ खाये समुद्र में तैरता रहा मछुआरा

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‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’ कहने को तो ये एक दोहा है लेकिन पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नारायणपुर निवासी रबींद्रनाथ दास पर यह पूरी तरह फिट बैठता है.

रबींद्रनाथ दास बंगाल की खाड़ी में लगातार 5 दिनों तक भूख से बेहाल बांस के सहारे तैरते रहे लेकिन मौत उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकी. जबकि रबींद्रनाथ के 11 साथी एक के बाद एक कर मौत के मुंह में जाते रहे लेकिन रबींद्रनाथ ने धैर्य और दृढ़ इच्छा बनाए रखी.

दास ने बताया कि इन पांच दिनों तक उन्होंने कुछ नहीं खाया बस जब बारिश होती थी तो वे इस पानी को पी लिया करते थे. आख़िरकार 10 जुलाई को एमवी जावेद जहाज के क्रू सदस्यों ने उन्हें दो घंटे के प्रयास के बाद बचा लिया.

क्या है मामला

दक्षिण 24 परगना जिले के नारायणपुर निवासी रबींद्र नाथ 4 जुलाई को अपने 13 अन्य साथियों के साथ समुद्र में मछली पकड़ने निकले थे. 6 जुलाई को तेज तूफान की वजह से नाव अचानक पटल गई और डूब गई. इस दौरान 11 साथी समेत वे पानी में कूद गए लेकिन तीन लोग नाव के नीचे दब गए. जबकि रबींद्रनाथ और बाकी बचे लोग समुद्र में कूद गए. उन्होंने जहाज से ईंधन ड्रम उतारकर उन्हें बांस और रस्सी से बांध दिया.

कोलकाता पहुंचने के बाद रबींद्रनाथ ने बताया, ‘मुझे सब कुछ याद है कि कैसे हमारा जहाज डूब गया और हम सभी पानी में कूद गए और तैरने लगे. मैं जितने दिन पानी में तैरता रहा, कुछ नहीं हुआ. वहां रुक-रुककर बारिश हो रही थी और बड़ी बड़ी लहरें आ रही थीं. जब बारिश होती थी तो मैं पानी पी लेता था.’

रबींद्र ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा इस बात का दुख है कि उन्हें बचाए जाने से कुछ घंटे पहले ही उनका भतीजा भी डूब गया. उन्होंने कहा, ” हम साथ में तैर रहे थे. उसके पास एक लाइफ जैकेट थी लेकिन वह काफी डरा हुआ था. उसे कुछ दिनों तक मैंने अपने कंधे पर उठाए रखा लेकिन मुझे बचाए जाने से कुछ देर पहले ही वह डूब गया. “