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रविदास मंदिर: दलित प्रदर्शन की ये तस्वीरें कितनी सच्ची हैं? – फ़ैक्ट चेक

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दिल्ली के तुग़लक़ाबाद इलाक़े में गुरु रविदास मंदिर गिराये जाने के ख़िलाफ़ कई दलित संगठनों ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल प्रदर्शन किया था.

ये प्रदर्शन बीते बुधवार को हुआ था. इस प्रदर्शन से जुड़ी तमाम तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे हैं, लेकिन बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि इनमें से कुछ बुधवार को हुए प्रदर्शन के नहीं हैं.

10 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुरु रविदास मंदिर को गिरा दिया गया था जिससे दलित समुदाय काफ़ी नाराज़ है.

उनका मानना है कि यह सब दिल्ली विकास प्राधिकरण की वजह से हुआ है जो केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के अधीन काम करता है.

यही वजह रही कि दिल्ली के इस प्रदर्शन में हरियाणा, पंजाब, यूपी और देश के अन्य हिस्सों से आये संत रविदास के अनुयायियों के बीच ‘मोदी सरकार मुर्दाबाद’ का शोर उठता दिखाई दिया.

लेकिन सोशल मीडिया पर जो लोग इस प्रदर्शन को प्रमोट कर रहे थे, हमने पाया कि उनमें के कुछ लोगों ने पुरानी तस्वीरें और वीडियो भ्रामक दावों के साथ शेयर किये हैं.

पुराने प्रदर्शन का वीडियो

‘जय भीम-जय भीम’ के नारे लगाती भीड़ का एक वीडियो जिसे एक बिल्डिंग की छत से शूट किया गया, सोशल मीडिया पर पाँच लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

30 सेकेंड के इस वीडियो में लोकेशन के तौर पर दिल्ली लिखा हुआ है और भीड़ के हाथों में नीले झंडे हैं.

ट्विटर पर ‘यूथ कांग्रेस के नेशनल कैंपेन इंचार्ज’ के तौर पर अपना परिचय देने वाले श्रीवत्स ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है जिसे सैकड़ों लोग शेयर कर चुके हैं.

इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा है, “दलितों के मुद्दे को मीडिया इसलिए नहीं उठाएगा क्योंकि ये हिंदुत्व प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ है. आरएसएस के लिए 1509 में बना संत रविदास का मंदिर महत्व नहीं रखता. मोदी और आरएसएस को सिर्फ़ दलितों के वोट चाहिए. वरना किसी प्रभावी समुदाय द्वारा की गई इतनी बड़ी रैली को क्या यूं ही नज़रअंदाज़ किया जाता?”

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि ये वीडियो नई दिल्ली के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि साल 2016 में हुए महाराष्ट्र के एक आंदोलन का है.

महाराष्ट्र का वीडियो

इस वायरल वीडियो को रिवर्स सर्च करने पर हमें मार्च 2018 में पोस्ट किये गए कुछ यू-ट्यूब वीडियो मिले जिनकी लंबाई फ़िलहाल वायरल हो रहे वीडियो की तुलना में थोड़ी ज़्यादा थी.

इनकी क्वालिटी अच्छी थी जिस वजह से हमें वीडियो से संबंधित तीन अहम सुराग़ मिले.

– पहला, वीडियो में दिखने वाले पोस्टर.

– दूसरा, एक दुकान जिसके बाहर लिखा है ‘व्यंकटेश कृषि भांडार’.

– तीसरा, वीडियो में दिख रहे बड़े पाइपनुमा ढांचे.

इनके आधार पर हमने जाँच को आगे बढ़ाया तो पता चला कि ‘व्यंकटेश कृषि भांडार’ पूर्वी महाराष्ट्र के नांदेड शहर की वीआईपी रोड पर स्थित है.

इसके बाद गूगल मैप्स की मदद से इस बात की पुष्टि की गई कि वीडियो में दिखने वाले ‘बड़े पाइपनुमा ढांचे’ इस कृषि भंडार से दक्षिण-पूर्व में स्थित बड़े गोदाम हैं जो वायरल वीडियो में साफ़ दिखाई देते हैं.गूगल मैप्स की मदद से की गई जगह की पहचान

नांदेड शहर में बीते कुछ वर्षों में हुए दलित प्रदर्शन के बारे में जब हमने इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि 16 अक्टूबर 2016 को ‘निर्धार महामोर्चा’ नाम के बैनर तले लाखों लोग शहर के कृषि उत्पन्न बाज़ार समिति मैदान में एकत्र हुए थे.

पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक बड़ा प्रदर्शन था और एससी, एसटी समेत ओबीसी वर्ग के दस लाख से ज़्यादा लोग इसमें शामिल हुए थे जिनकी माँग थी कि दलित उत्पीड़न रोकथाम क़ानून में कोई बदलाव ना किया जाये.

बीबीसी ने पाया कि यह वीडियो दिल्ली के प्रोटेस्ट का बताये जाने से पहले साल 2018 में प्रकाश आंबेडकर के ‘एल्गार मोर्चा’ के बैनर तले मुंबई के सीएसएमटी इलाक़े में जमा हुए प्रदर्शनकारियों का बताकर वायरल हो चुका है.

साथ ही बिहार, जोधपुर और इंदौर में हुए दलित प्रदर्शनों के तौर पर भी सोशल मीडिया पर इसे शेयर किया गया है.

नीले झंडे और लोगों का सैलाब

जनसैलाब की यह तस्वीर भी सोशल मीडिया पर दिल्ली में हुए दलित प्रोटेस्ट की बताकर शेयर की जा रही है.

काफ़ी ऊंचाई से खींची गई इस तस्वीर में भारी भीड़ दिखाई देती है और झंडों के रंग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों ने ‘भीम आर्मी’ के झंडे ले रखे हैं.

लेकिन यह एक फ़र्ज़ी तस्वीर है और फ़ोटो एडिटिंग के ‘कमाल’ से इसे तैयार किया गया है.

असल में यह तस्वीर साल 2016 के ‘मराठा क्रांति मूक मोर्चा’ की है और भीड़ के हाथों में केसरिया (भगवा) रंग के झंडे थे, जिन्हें फ़ोटो एडिटिंग की मदद से बदलकर नीला कर दिया गया है.

रिवर्स इमेज सर्च के नतीजे बताते हैं कि इस फ़र्ज़ी तस्वीर को साल 2016 से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए दलित प्रदर्शनों के दौरान शेयर किया जाता रहा है.

लेकिन इस जगह की पहचान तस्वीर में दिख रही ‘सम्भाजी पुलिस चौकी’ और ‘सम्भाजी मित्र मंडल’ नाम की दुकान से हुई जो महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित है.

फ़ोटो की पड़ताल

साल 2016 में पुणे शहर में हुए बड़े प्रदर्शनों के बारे में सर्च करने पर पता चला कि 25 सितंबर 2016 को ‘मराठा क्रांति मूक मोर्चा’ के बैनर तले 16 मराठा संगठनों ने यह प्रदर्शन आयोजित किया था जिसमें पंद्रह लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था.

पुणे में मराठाओं के प्रदर्शन का जो फ़ोटो सोशल मीडिया पर दिल्ली के दलित प्रोटेस्ट का बताकर शेयर हो रहा है, वो दरअसल मराठा क्रांति मोर्चा की आधिकारिक वेबसाइट पर छपी एक फ़ोटो गैलरी से लिया गया है.

हमने पाया कि अक्तूबर 2016 में कई ट्विटर यूज़र्स ने #marathakrantimorch के साथ इस तस्वीर को शेयर किया था.

पुणे शहर में हुआ यह प्रदर्शन मराठा समुदाय के कई महीनों तक चले प्रदर्शनों की एक सिरीज़ का हिस्सा था.

इस दौरान महाराष्ट्र के छोटे शहरों-क़स्बों, ज़िलों और तालुका मुख्यालयों के बाहर भी मराठा समुदाय ने प्रदर्शन किये थे.

इन प्रदर्शनों के पीछे इस समुदाय की आरक्षण और किसानों को पेंशन जैसी कुछ मांगें थीं. इनमें से एक प्रमुख माँग ये भी थी कि दलित उत्पीड़न रोकथाम क़ानून में बदलाव किया जाये.

मराठा समुदाय के लोगों का यह आरोप था कि ‘इस क़ानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है. ये केंद्र का क़ानून है, इसलिए इसमें संशोधन केंद्र सरकार ही कर सकती है’.