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अगर तीज के त्यौहार में लगाने वाली हैं मेहंदी तो जरूर पढ़ें ये रिपोर्ट…

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सुंदर दिखने के लिए प्रयोग की जा रही केमिकल युक्त हेयर डाई, मेंहदी, बिंदी और सिंदूर त्वचा का रोग दे रहे हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है। इनके प्रयोग से डर्मेटाटिस का खतरा है। इसे एक्जिमा कहा जाता है। यह त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की शोध में यह बात सामने आई है।

इसकी रिपोर्ट शनिवार को सार्वजनिक की गई। शोध करने वाली डॉक्टर रीति भाटिया ने बताया कि 106 मरीजों पर जनवरी 2015 से अक्तूबर 2017 के बीच शोध किया गया। इसमें 77 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल थे। बतादें कि रीति भाटिया वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में कार्यरत हैं।

हेयर डाई का प्रयोग अधिक : शोध में 21 तरह के सौंदर्य प्रसाधन के प्रयोग की बात सामने आई थी। एक्जिमा की बीमारी के लिए सबसे ज्यादा हेयर डाई को कारण माना गया है। हर्बल मेहंदी, साबुन, लिपिस्टिक, नेल पॉलिश, शैंपू, सनसक्रीन, बिंदी, सिंदूर, स्कीन लाइटिंग क्रीम भी एक्जिमा का कारण बन रहे हैं। शोध के दौरान 35 फीसदी लोगों में केमिकल वाले हेयर डाई और फेयरनेस क्रीम से बीमारी होने की समस्या आम दिखी है। एक्जिमा की जगह त्वचा के रंग में बदलाव भी देखा गया।

कोई नियमावली नहीं 
एम्स चर्म रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि हेयर डाई और हर्बल मेहंदी में पीपीडी मिला होता है, जिससे एक्जिमा होता है। इसके अलावा सिंदूर और बिंदी में भी गैलेट मिलाया जाता है, जिससे यह बीमारी होती है। इन चीजों का निर्माण का असंगठित क्षेत्र के लोगों द्वारा होता है, जिसे लेकर कोई नियमावली नहीं है। इसपर दिशा-निर्देश लाए जाने की आवश्यकता है।

आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर जांच 
हर्बल डाई में किस तरह के केमिकल मिले होते है, उसे लेकर एम्स ऋषिकेश और आईआईटी रूड़की के साथ मिलकर जांच की जा रही है। कुछ अंतराष्ट्रीय शोध में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि इससे एक्जिमा हो रहा है।

मसाज से त्वचा ढीली 
एम्स के चिकित्सकों ने कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया कि जरूरत से ज्यादा मसाज कराने से त्वचा ढीली हो जाती है। इससे भी एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है।

लेजर थेरेपी से इलाज 
हेयर डाई लगाने के दौरान जब सिर धोया जाता है तो चेहरे पर डाई का पानी आता है। इससे चेहरे पर उसका असर देखने को मिलता है। अगर ऐसे सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग से शरीर पर कुछ असर होता है, तो तुरंत उपयोग बंद करें। इस बीमारी का इलाज लेजर थेरेपी की मदद से 70 फीसदी तक संभव है।