Home समाचार छत्तीसगढ़ की वनतुलसी पर बांग्लादेश की नजर, किसान हो रहे मालामाल जानिए…

छत्तीसगढ़ की वनतुलसी पर बांग्लादेश की नजर, किसान हो रहे मालामाल जानिए…

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003

 छत्तीसगढ़ की वनतुलसी पर बांग्लादेश की नजर लग गई है। बांग्लादेश के व्यापारियों की रुचि के चलते छत्तीसगढ़िया तुलसी के आयात के दरवाजे भी खुल गए हैं। मैसूर और बेंगलुरु की अगरबत्ती निर्माता इकाइयां हमेशा से छत्तीसगढ़ की ही वनतुलसी की खरीदी को प्राथमिकता देती रही हैं, लेकिन इस बार स्थितियां कुछ बदली-बदली सी नजर आ रही है। चौतरफा मांग और कम उत्पादन के किसानों को अच्छी कमाई के आसार हैं।

बेंगलुरु और मैसूर की अगरबत्ती निर्माता कंपनियों की मांग वैसे तो हमेशा से रहती आई है लेकिन अगस्त से नवंबर माह का समय हमेशा से इन इकाइयों के लिए संकट का माना जाता है क्योंकि स्टॉक लगभग समाप्ति की ओर हो चुका होता है, लेकिन इस बार बांग्लादेश ने छत्तीसगढ़ की वनतुलसी के लिए अपना बाजार खोल दिया है इसलिए इन दोनों शहरों को आपूर्ति कम कर दी गई है।प्रदेश में स्टॉक का हाल यह है कि यह लगभग समाप्ति की ओर है इसलिए ऊंचे दर पर खरीदी हो रही है।

पूरा छत्तीसगढ़ वनतुलसी से आच्छादित

वनतुलसी के लिए पूरा छत्तीसगढ़ श्रेष्ठ माना जाता है। हर जिला, हर गांव इससे धनी है। नवंबर के माह में जब नई फसल तैयार होने लगती है, तभी से सौदे होने लगते हैं लेकिन इस बार स्थितियां पूरी तरह विपरीत है क्योंकि बांग्लादेश में इस तुलसी की अच्छी मांग है।

क्या है वनतुलसी

तुलसी परिवार का सदस्य होने से इसे भी महत्ता मिली हुई है। मेडिशनल प्रॉपर्टीज के गुण ज्यादा होने के बाद भी इसे घरों में जगह नहीं मिली। अनुसंधान में तुलसी की जिन प्रजातियों की पहचान हुई है उसमें इसे दसवां सदस्य माना गया है।

जो नौ और सदस्य उनमें राम तुलसी, बहु तुलसी, ज्ञान तुलसी, श्वेत तुलसी, रजत तुलसी और बनतुलसी जैसे मुख्य है। लेकिन सबसे ज्यादा औषधीय गुण इसी में मिले है। घरों में जगह नहीं मिलने से इसने अपने आप को खरपतवार के बीच बसा लिया है। 4 से 5 फीट तक की ऊंचाई वाला वनतुलसा का बीज दिसंबर के अंत में तैयार हो जाता है।

ये औषधीय गुण

इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक्स, एंटी बैक्टीरिया, एंटी डिजीज, एंटी बर्न के अलावा और महत्वपूर्ण गुण मिले हैं। देश में इसके बीज के पाउडर को अगरबत्ती के पाउडर को स्टिक में चिपकाने के लिए उपयोग किया जाता है लेकिन बांग्लादेश ने इसके बीज से आयुर्वेदिक दवा बनाने की उपयोग करना शुरू कर दिया है।

ऐसे हैं भाव

मैसूर, बेंगलुरु में पूरे साल मांग बने रहने से जो बीते बरस 1400 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल पर था। वह आज बांग्लादेश को निर्यात किए जाने के बाद 1800 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच चुका है। नई फसल नवंबर-दिसंबर में आने के बाद भाव में और तेजी की संभावना है क्योंकि निर्यात के बाद घरेलू मांग के दबाव के बीच और बढ़ने की पूरी संभावना है।

वनतुलसी मुख्यतः तुलसी परिवार का ही एक प्रजाति है। इसमें मेडिशनल प्रॉपर्टीज बहुत है। आयुर्वेदिक दवाई बनाने से इसे अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने लगी है । बनी दवाइयों का सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें