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छत्तीसगढ़ : फायनेंस कंपनियों के जाल में उलझ रहे लोग, बिना जानकारी के ही बिक जाता है वाहन

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राजधानी में संचालित फाइनेंस कंपनियां ग्राहकों को अंधेरे में रखकर फार्म क्रमांक 29 और 30 पर दस्तखत करा रही हैं। ग्राहकों को इसकी भनक तक नहीं लगती है। गाड़ी की एक-दो किस्त अदा न करने पर फाइनेंस कपनियां जबरन गाड़ी खींचकर उसे दूसरे ग्राहक को बेच देती हैं।

फार्म 29 और 30 पर दस्तखत होने की वजह से गाड़ी मालिक कुछ नहीं कर पाता है। इससे गाड़ी मालिक को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों से सावधान रहने की जरूरत है। आरटीओ अधिकारी का कहना है कि फाइनेंस कंपनियों द्वारा फार्म पर दस्तखत कराने की शिकायत आ रही है, जल्द ही इस तरह की फाइनेंस कंपनियों को चिंहित कर कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञात हो कि रायपुर आरटीओ कार्यालय से एक माह में 10 हजार मोटरसाइकिल, चार हजार कार और तीन सौ ट्रक का रजिस्ट्रेशन होता है। इनमें से करीब 50 प्रतिशत गाड़ियां लोन पर रहती हैं। राजधानी में करीब 200 फाइनेंस कंपनियां हैं, जो ऑटो डीलरों के साथ मिलकर वाहन फाइनेंस करने का काम कर रही हैं। इनमें से कुछ प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों द्वारा ग्राहकों से दस्तखत कराया जा रहा है, जो नियम के विरुद्ध है।

फाइनेंस कंपनी करती है ऐसे काम

फाइनेंस कंपनी 29 और 30 नंबर फार्म पर गाड़ी संचालक से दस्तखत करा लेती है। इसके बाद गाड़ी खींचकर पार्टी टू पार्टी ट्रांसफर कर देते हैं। नीलामी के दौरान फाइनेंस कंपनी पुराने कागजात को पेश कर देती है। आरटीओ में पुराने कागजात पेश होने से आसानी से गाड़ी ट्रांसफर करा देते हैं।

फाइनेंस कंपनी को इस प्रकार का करना है काम

किसी भी फाइनेंस कंपनी को गाड़ी खींचने के बाद फार्म क्रमांक 35 और 36 पर इसे चढ़ा कर अपने नाम करवाना चाहिए। इसके बाद गाड़ी का पूरा टैक्स जमा कर इसे बेचना चाहिए, लेकिन कोई भी फाइनेंस कंपनी ऐसा नहीं करती है।

ग्राहक भी रहें सावधान

परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि यदि कोई वाहन मालिक वाहन को फाइनेंस पर खरीदा है, वह किसी कारणवश किस्त अदा नहीं कर पा रहा है तो फाइनेंस कंपनी को पहले आरटीओ कार्यालय में आकर बताना है। उसके बाद उसे गाड़ी खींचने की कार्रवाई करना है, लेकिन फाइनेंस कंपनी ग्राहक से पहले ही फार्म क्रमांक 29 और 30 दस्तखत लिए रहती है। उसके बाद वह थर्ड पार्टी को गाड़ी की बिक्री कर देती हैं। फार्म पर दस्तखत होने की वजह से विभाग भी दखल नहीं दे पाता है, इसलिए ग्राहक को भी सावधान रहने की जरूरत है।

केस 1

ठक्कर बापा वार्ड गुढ़ियारी निवासी विजय बेंद्रे ने सीजी 04 एसपी 4276 वाहन लिया था उन्होंने चोलामंडलम फायनेंस कंपनी से फायनेंस कराया था। 20 सितंबर 2018 को प्रिंस ढ़ाबा गुढ़ियारी के पास चोला मंडलम फायनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने किस्त की राशि जमा न करने की बात कहकर गाड़ी की चाबी छीनकर डरा-धमकाकर वाहन लेकर चले गए। विजय ने आरटीओ में शिकायत की है।

केस 2

टाटीबंघ रायपुर निवासी संतोष चावला पति ओम प्रकाश चावला ने सीजी 04 एमजे 7893 सहित दो वाहन और लिया था। इसका फायनेंस चोलामंडलम कंपनी से कराया था। प्रतिमाह नियमित किस्त का भुगतान कर रहा था। लेकिन पति के बीमार होने की वजह से कुछ किस्त का भुगतान नहीं कर पाई।

फायनेंस कंपनी का ट्रिप लोन स्कीम में 14,00,000 जमा किया गया। उसके बाद अप्रैल 2019 में लगभग 5,80,000 का भुगतान कंपनी को किया गया। लेकिन उसके बाद भी कंपनी बिना सूचना के गुंडागर्दी करते हुए तीनो वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया। लोन देते समय फायनेंस कंपनी ने कई कोरे फार्म पर दस्तखत करवा लिया है। इससे साथ ही टीटीओ फार्म पर भी हस्ताक्षर करवा लिया है।

फाइनेंस कंपनियों से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। फाइनेंस कंपनियों द्वारा फार्म क्रमांक 29 और 30 पर दस्तखत करवाया लिया जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं करना है। ऐसे लोगों को चिन्हित कर खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – शैलाभ साहू, आरटीओ, रायपुर