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प्याज़ की बढ़ती कीमतों पर जल्द लगाम नहीं लगी तो प्याज़ बिगाड़ सकता है राजनीति का स्वाद – प्रकाशपुंज पाण्डेय

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देश में प्याज़ की बढ़ती कीमतों पर राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्याज़ की बढ़ती कीमतों से लोगों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। प्याज़ के दाम दिल्ली में 70 – 80 रुपए प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गए हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी कई जगह पर प्याज़ महँगा हो गया है। कम सप्लाई और डिमांड में तेजी के चलते कीमतों में उछाल आया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से उठाए कदमों का असर फिलहाल नहीं दिख रहा है। लेकिन बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों ने जरुरत से कम प्याज़ ख़रीदना शुरू कर दिया है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय का कहना है कि बाजार में प्याज़ के दाम बढ़ने का कारण किसानाें के पास प्याज़ का स्टॉक खत्म हाेना है। अगर नया प्याज़ बाजार में नहीं आया ताे दाम 80 रुपए के पार भी पहुंच सकते हैं। प्याज़ की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने इसका न्यूनतम निर्यात मूल्य 850 डॉलर प्रति टन तय किया है। इससे प्याज़ निर्यात कम करने में मदद मिलेगी और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ने से दाम में कुछ राहत मिलेगी। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले कुछ दिनों में प्याज़ की कीमत बढ़कर 70 – 80 रुपए प्रति किलो हो गई। कुछ दिन पहले यह 20-30 रुपये प्रति किलोग्राम थी। न्यूनतम निर्यात मूल्य तय होने के बाद उस चीज़ का उससे कम दाम पर निर्यात नहीं किया जा सकता। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना में कहा कि प्याज़ की सभी किस्मों के निर्यात के लिए अगले आदेश तक न्यूनतम 850 डॉलर प्रति टन के MEP के अनुसार केवल साख पत्र के तहत निर्यात की अनुमति होगी।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि दिल्ली, मुंबई और रायपुर समेत कई बड़े शहरों में प्याज़ की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं । मंडी में कम हाेने से बाजार में अच्छे प्याज़ के दाम 70 रुपए किलाे तक पहुंच गए हैं जबकि सड़े गले प्याज़ काे भी 35 रुपए प्रति किलाे तक के ग्राहक मिल रहे हैं। दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में रोज़ाना 250 ट्रक प्याज़ पहुँचती है लेकिन अब सप्लाई घटकर 50-60 ट्रक पर आ गई है ऐसे में फेस्टिव सीजन के दौरान आम आदमी पर बोझ बढ़ना लगभग तय है। अगर प्याज़ की सप्लाई नहीं बढ़ी तो दीवाली तक कीमतें 80 रुपए प्रति किलोग्राम के पार पहुंच कर जनता का दीवाला निकाल सकती है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे प्याज़ उत्पादक राज्यों में बारिश की वजह से फसल खराब होने की आशंका है। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि फसल कितनी खराब हुई है। बारिश के थमने के बाद ही यह आकलन हो पाएगा। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण इस महत्वपूर्ण सब्जी की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच केंद्र और राज्य सरकारों को प्याज़ की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।

साथ ही प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि अगर जल्द ही सरकारों ने प्याज़ की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल नहीं किया तो हो सकता है इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़े, क्योंकि कालांतर में भी देखा गया है कि भारतीय राजनीति के इतिहास में प्याज़ की बढ़ती कीमतों ने सरकारों से उनकी सत्ता छीन ली है।