Home छत्तीसगढ़ तकनीक की मदद से रेगिस्तान पर हो रहा है ये अनोखा कमाल

तकनीक की मदद से रेगिस्तान पर हो रहा है ये अनोखा कमाल

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विज्ञान और तकनीक का विकास लोगों के जीवन को दिन प्रतिदिन सहज बनाते जा रहे हैं। तकनीक ने हमें वो सुख-सुविधाएं प्रदान की है, जिसके बारे में हम कभी सोच नहीं सकते थे। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में तकनीक के विकास का महत्वपूर्ण योगदान है। नए-नए तकनीक ऐसा काम करते जा रहे हैं, जिसे करना कुछ समय पहले असंभव सा लगता था। अब इस तकनीक का ऐसा नया विकास हुआ है कि रेगिस्तान पर भारी मात्रा में फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं। साधारण तौर पर रेगिस्तान का वातावरण अत्यंत गर्म होता है। लेकिन इसके बावजूद तकनीक का इस्तेमाल कर हजारों किलो फल व सब्जियां उगाई जा रही हैं।

रेगिस्तान में समुद्र के खारे पानी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर वैज्ञानिकों ने फल, टमाटर और खीरा जैसी सब्जियों को उगाने की तकनीक विकसीत की है। दरअसल, ब्रिटेन की ग्रीनहाउस कंपनी सीवाटर ग्रीनहाउस ने ऑस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड, ओमान और टेनेराइफ के रेगिस्तानों पर एक नवीनतम तकनीक वाली ग्रीनहाउस बनाई है। रेगिस्तान में होने वाली अत्यंत गर्मी से बचने के लिए इस ग्रीनहाउस में मोटे गत्तों का खास तरह से इस्तेमाल कर ठंडक की व्यवस्था की गई है। कंपना का यह तकनीक बिल्कुल सफल है, जिससे भारी मात्रा में फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं।

रेगिस्तान क्षेत्र में बने इस ग्रीन हाउस को शीशे से बनाया गया है। ग्रीन हाउस को कुछ इस तरह से डिजायन किया गया है कि यह अंदर के वातावरण को अनुकूल रखता है। इस ग्रीन हाउस के अंदर ठंडक और नमी बनाए रखने के लिए गत्तों से बने कुलिंग हाउस का निर्माण किया गया है। कुलिंग हाउस बनाने में लगे गत्तों को गीला किया जाता है और जब गत्तों पर बाहर से गर्म हवा पड़ती है तो वाष्पीकरण की वजह से भीतर का तापमान कम हो जाता है।

गत्तों को गीला करने के लिए सोलर पंप लगाए गए हैं। यह पंप गत्तों के ऊपर समुंद्र का खारा पानी छिड़कते हैं। यह पानी गत्ते की दीवारों से होता हुआ वाष्पित हो जाता है। वाष्पीकरण होने की वजह से ग्रीन हाउस के अंदर ठंडक पैदा हो जाती है। ग्रीन हाउस की इस अनोखी तकनीक के माध्यम से अंदर का वातारण खेती के अनुकूल हो जाता है।

समुद्र का खारा पानी वजह से गत्तों पर नमक भी जमा हो जाता है। इस नमक के जमा होने के भी दो फायदे हैं। एक तो नमक के वजह से गत्ते मजबूत बनते हैं और दूसरा इस नमक को व्यावसायिक तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

सोमालीलैंड में इस खेता के माध्यम से हर साल करीब 750 टन टमाटर उगाई जा रही है। ग्रीन हाउस का निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक चार्ली पैटन ने बताया कि वह दूनिया के और खे इलाकों में वह इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने ये भी बताया कि सोमीलैंड में अगर मात्र 2000 हेक्टेयर में ऐसी खेती की जाए तो करीब 40 लाख जनसंख्या का पेट भरा जा सकता है।