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सन ग्लास से जुड़े मिथक के बारे में जानने के लिए यह जरूर पढ़ें…

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धूप से आंखों को सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए चश्मों की सुंदर जोड़ी को खरीदने का ऑफर मिलना या इससे जुड़े बहुत सरे मिथक हैं जो आपको सनग्लास यानी धूप का चश्मा खरीदने से रोक देते हैं।

विशेषज्ञों धूप के चश्मे से जुड़े इन मिथकों के बारे में बताया है :

धूप के चश्मे के साथ जुड़ा एक मिथक यह है कि इन्हें सिर्फ फैशनेबल नजर आने के लिए पहना जाता है। ये सिर्फ फैशन का सामान नहीं होते हैं। सन ग्लास आपको स्मार्ट लुक देने के साथ ही सूरज की हानिकारक किरणों से भी आपकी आंखों को सुरक्षित रखते हैं।

  • जो लोग सही से दिखाई देने के लिए चश्मा पहनते हैं, वे सोचते हैं कि सन ग्लास उनके चश्मे के नंबर में उपलब्ध नहीं होता है और यह सिर्फ धूप का चश्मा है, इसलिए ठीक से दिखाई नहीं देगा, यह गलत धारणा है। आजकल बाजार में नंबर के अनुसार, ऐसे धूप के चश्मे उपलब्ध है, जिससे आपको सही से दिखाई देगा और आपकी आखों की धूप से भी रक्षा भी होगी।
  • धूप के चश्मों के लेकर यह भी मिथक है कि सारे धूप के चश्मे पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करते हैं। हालांकि, चश्मे का ग्लास और पॉलीकार्बोनेट पराबैंगनी किरणों की कुछ मात्रा को अवशोषित कर लेते हैं, लेकिन पूरी तरह से सुरक्षा पाने के लिए लेंस पर कोटिंग करवाना आवश्यक हैं।
  • धूप का चश्मा ऐसा खरीदें जो सामने और पीछे दोनों ओर से पराबैंगनी किरणों को 90-100 प्रतिशत तक रोक दे।
  • कई लोग यह सोचकर धूप का चश्मा पहनते हैं कि इसे नहीं पहनने की बजाय इसे पहनने से कम से कम आखों को कुछ तो सुरक्षा मिलेगी, इसलिए लोग किसी भी क्वालिटी का चश्मा खरीद लेते हैं, लेकिन सस्ता धूप का चश्मा पहनना अपकी आंखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है .
  • अगर उनसे आपकी आंखों पर सिर्फ छाया होती है और हानिकारक किरणों यूवीए व यूवीबी से सुरक्षा नहीं मिलती हैं तो फिर ऐसे चश्मों के जरिए हानिकारक किरणें सीधे आपकी आंखों पर पड़ती हैं, जो बहुत हानिकारक हैं, इसलिए हमेशा उत्तम क्वालिटी का ही धूप का चश्मा प्रयोग करें .