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जानिए धनतेरस, नरक चतुदर्शी, दिवाली, गोवर्द्धन पूजा और भाई दूज का सही मुहू्र्त…

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‘दिवाली’ हिंदुओं में मनाया जाने वाला प्रमुख धर्मिक पर्व है जिसे पांच दिन मनाया जाता है, ‘दिवाली’ को दीपों का त्‍योहार कहते हैं। ‘दिवाली’ अंधेरे से उजाले में जाने का प्रतीक है, इसे पूरे पांच दिनों तक बड़े हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाया जाता है, ये पांच दिन होते हैं, धनतेरस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्द्धन पूजा और भाईदूज, हर दिन का खास महत्व है।

चलिए इन पांचों दिनों के महूर्त और महत्व के बारे में जानते हैं…

  • धनतेरस की तिथि: 25 अक्‍टूबर 2019
  • धनतेरस पूजा मुहूर्त: 25 अक्‍टूबर को शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 13 मिनट तक

दीपावली का पहला दिन धनतेरस के रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

कृष्ण ने दैत्य नरकासुर का संहार किया था
छोटी दिवाली या नरक चतुदर्शी

इस बार छोटी दिवाली या नरक चतुदर्शी को लेकर थोड़ा सा कन्फ्यूजन हो गया है इस बार चतुदर्शी तिथि 26 अक्टूबर को तीन बजकर 46 मिनट से लग रही है, जो कि 27 अक्टूबर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगी इसलिए छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली दोनों ही 27 अक्टूबर को है।

कृष्ण ने दैत्य नरकासुर का संहार किया था

आपको बता दें कि धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा है कि इसी दिन कृष्ण ने दैत्य नरकासुर का संहार किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त किया था। इस दिन को छोटी दीपावली के रूप में भी मनाते हैं।

बड़ी ‘दिवाली’ पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है
बड़ी दिवाली

बड़ी ‘दिवाली’ पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, कहा जाता है जब तक भगवान गणेश और मां लक्ष्‍मी की पूजा न की जाएं दीवाली की पूजा अधूरी रहती है।

मुहूर्त

लक्ष्‍मी पूजा मुहुर्त: 27 अक्‍टूबर 2019 को रात 12 बजकर 23 मिनट तक
कुल अवधि: 01 घंटे 30 मिनट

भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाया था
गोवर्द्धन पूजा

गोवर्द्धन पूजा / अन्‍नकूट की तिथि: 28 अक्‍टूबर 2019
गोवर्द्धन पूजा मुहूर्त: 28 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट से शाम 05 बजकर 36 मिनट तक

भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाया था

कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा था जिसके नीचे सभी नंदगांव के लोगों ने आश्रय लिया था। इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी।

दीवाली का आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है
भाई दूज

दीवाली का आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भाई और बहनों के लिए समर्पित होता है।

भैयादूज : 29 अक्‍टूबर 2019

पूजा मुहूर्त: : दोपहर 01 बजकर 11 मिनट से दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक