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छत्तीसगढ़ : टाइगर रिजर्व में फंदा लगाकर तेंदुए का शिकार

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अचानकमार टाइगर रिजर्व में दिनदहाड़े फंदे लगाकर तेंदुए का शिकार किया गया। जाल में फंसने के बाद शिकारियों ने मारने के लिए भाले का इस्तेमाल किया। एक के बाद एक कई बार प्रहार किए गए। तेंदुए जोर-जोर से दहाड़ता रहा, लेकिन जंगल के रखवालों को उसकी गूंज सुनाई नहीं दी। विभाग आरोपितों को पकड़कर बेवजह वाहवाही लूट रहा है। घटना लोरमी बफर के कक्ष क्रमांक 404 की है। जहां तेंदुए का शव मिला था। जिसे देखते ही वन अमले के होश उड़ गए। हालांकि यह एरिया मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ का बार्डर कहलाता है। लेकिन घटना स्थल टाइगर रिजर्व के दायरे में आता है। जाल में यही बिछाया गया था।

शिकारियों ने अपराध को अंजाम देने से पहले इतना सब कुछ बड़ी आसानी से किया, लेकिन विभागीय अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। फंदा लगाने के बाद इसमें तेंदुआ फंस गया। इसके फंसते ही शिकारियों ने भाले से कई बार वार किए। शरीर के हर हिस्से में छेद किया गया। मौत से पहले तेंदुआ दहाड़ता रहा। इसे वन अमले नहीं सुना है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन यही कह रहा है, जबकि हकीकत यह है कि तैनात ही नहीं था।

अधिकारियों ने इस क्षेत्र का कभी दौरा किया हो, यह किसी याद भी नहीं। शिकार के बाद भले ही विभाग ने 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर सफलता हासिल की हो, लेकिन घटना केवल लापरवाही की वजह से हुई है। विभाग की तत्परता ऐसी कि घटना के पांच दिन बाद जानकारी मिली। शिकार की यह घटना शनिवार की दोपहर 12 बजे हुई। इसकी खबर बुधवार को मिली।

कैमरे लगाने नहीं जाते तो पता ही नहीं चलता

तेंदुए के शिकार की यह घटना सामने नहीं आती, यदि ट्रैप कैमरा लगाने के लिए वन अमला इस पहाड़ी क्षेत्र में नहीं पहुंचा। दरअसल अभी वन्यप्राणियों की फोर फेस गणना चल रही है। इसके लिए कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए अमला वहां पहुंचा था। तभी उनकी नजर तेंदुए कटे शव पर पड़ी। शिकार उसके पंजा, जीभ, मूंछे, नाखून व दांत समेत सभी प्रमुख अंग काटकर ले गए थे। इसे काटने के लिए तब्बल व कुल्हाड़ी का इस्तेमाल हुआ था।

अस्तित्व में नहीं एसटीपीएफ, चार माह से सर्चिंग बंद

शिकारियों की घुसपैठ के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ही जिम्मेदार है। दरअसल मानिटरिंग के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया गया। यह बेहद महत्वपूर्ण सर्चिंग टीम है। लेकिन बजट के अभाव में जुलाई से यह फोर्स अस्तित्व में ही नहीं है। टाइगर रिजर्व के अंदर चार माह से सर्चिंग ही नहीं हो रही है। इसी वजह से शिकारी आसानी से घुसकर घटना को अंजाम देकर फरार हो गए थे।

पांच फरार, पकड़ने में छूट रहा पसीना

तेंदुए के शिकार की इस घटना को 22 लोगों ने मिलकर अंजाम दिया है। लेकिन विभाग ने केवल 17 को पकड़ने में सफलता हासिल की है। पांच अब भी फरार हैं। उनकी पहचान के बावजूद पकड़ने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं।