Home जानिए इन कहानियों में है छठ पूजन का इतिहास, जानिए प्रभु श्री राम...

इन कहानियों में है छठ पूजन का इतिहास, जानिए प्रभु श्री राम से लेकर राजा प्रियवद तक की कथाएं

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003

आपको बता दें, कि छठ पूजा का विशेष महत्व होता हैं सूर्य देव और छठी मैया की पूजा को समर्पित छठ पूजा आज से शुरू हो चुकी हैं इस दिन सूर्य देव और छठी मैया की विधि विधा से पूजा होती हैं सूर्य देव और छठी मैया की पूजा कब से शुरू हुई इसके बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया हैं कि सतयुग में प्रभुश्री राम और माता सीता, द्वापर में दानवीर कर्ण और पांच पांडवें की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी

छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक कथा राजा ​प्रियवद की हैं जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं सूर्य की उपासना और छठ पूजा के इतिहार और कथा के बारे में, तो आइए जानते हैं।

एक पौराणिक कथाओं के मुताबिक राजा प्रियवद निसंतान थे, उनको इसकी पीड़ा थी। उन्होनें महर्षि कश्यप से इसके बारे में बात की तब म​हर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लि पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। उस दौरान यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर राजा प्रियवद की पत्नी मालिनी को खाने के लिए दी गई। यज्ञ के खीर के सेवन से रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया। मगर वह मृत पैदा हुआ था।

राजा प्रियवद मृत पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और पुत्र वियोग में अपना प्राण त्यागने लगे। उसी समय ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई उन्होंने राजा प्रियवद से कहा, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं। इसलिए मेरा नाम षष्ठी हैं। तुम मरेी पूजा करो और लोगो में इसका प्रचार प्रसार करों। माता षष्ठी के कहे अनुसार, राजा प्रियवद ने पुत्र की कामना से माता का व्रत विधान से किया, उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी थी। इसके फलस्वरूप राजा प्रियवद को पुत्र प्राप्त ​हुआ।