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हाउसफुल 4 के आंकड़ों पर क्यों मचा है बवाल, जानिए कैसे होती है आंकड़ों में हेराफेरी?

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चीन की तरह क्या भारत में भी सिनेमाघरों की कमाई सरकार की निगरानी में होनी चाहिए? क्या हिंदी फिल्मों के आंकड़ों में हेराफेरी हो रही है? क्या हिंदी फिल्मों में काला धन लगाने के लिए डिजिटल बुकिंग का सहारा लिया जा रहा है और क्या फिल्मों के कारोबार की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए किसी स्वतंत्र नियामक एजेंसी की जरूरत आ गई है? ये सारे सवाल हिंदी फिल्म उद्योग के सामने फिल्म हाउसफुल 4 के आंकड़ों को लेकर मची रार के साथ उठ खड़े हुए हैं।

अक्षय कुमार की फिल्म हाउसफुल 4 इस साल दिवाली पर रिलीज हुई। विदेशी वितरण कंपनी फॉक्स स्टार की भारतीय शाखा ने इसे दुनिया भर में रिलीज किया। इस कंपनी के प्रतिनिधि हिमांशु मिस्त्री के मुताबिक फिल्म ने रविवार तक 175 करोड़ 58 लाख रुपये का कुल कलेक्शन किया। फिल्म कारोबार में किसी फिल्म की कमाई के लिए ग्रॉस (कुल) और नेट (अंतिम) कमाई के आंकड़े जारी किए जाते हैं। कुल कमाई वह आंकड़े होते हैं जितनी कि टिकटें सिनेमाघरों में बिकती हैं। फिर इसमें से थिएटर में फिल्म दिखाने का खर्चा, इसके प्रचार प्रसार में हुआ खर्चा और तमाम टैक्स घटाकर अंतिम कमाई का आंकलन किया जाता है।
फिल्म हाउसफुल 4 के शुरूआती आंकड़े आते ही सबसे पहले फिल्म निर्माता रॉनी स्क्रूवाला ने इस मामले पर अपनी राय रखी। 29 अक्टूबर को एक ट्वीट करके रॉनी ने फिल्म कारोबार के आंकड़ों में सटीक जानकारी की वकालत की और फिल्म कारोबार के आंकड़े जारी करने वाले दो ट्रेड विशेषज्ञों को टैग करते हुए लिखा कि ये समय की जरूरत है और आंकड़ों को बढ़ाचढ़ाकर निर्माताओं के अहं को संतुष्ट करने की परंपरा बंद होनी चाहिए। रॉनी ने एक दूसरी ट्वीट करके ये भी स्पष्ट किया कि ये बात वह किसी फिल्म विशेष के लिए नहीं लिख रहे हैं।

जिन ट्रेड विशेषज्ञों को रॉनी ने अपनी ट्वीट में टैग किया उनमें से कोमल नाहटा ने इस पर जवाब देते हुए ट्विटर पर ही लिखा कि भारत जैसे देश में ऐसी उम्मीद करना ज्यादती है। उन्होंने ये कहकर मामले को और बढ़ा दिया कि जब तक फिल्म निर्माता खुद ईमानदार होने का फैसला नहीं करते तब तक इस बारे में कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। अगर निर्माता, वितरक और प्रदर्शक आंकड़ों को बढ़ाचढाकर पेश करना बंद नही करते, तो फिल्म कारोबार के असली आंकड़े हासिल करना किसी के लिए भी मुश्किल काम है।

मामला तब और बिगड़ा जब भारत में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही एक विदेशी फिल्म कंपनी की भारतीय शाशा एनबीसी यूनीवर्सल इंडिया के विक्रय प्रमुख नितिन बिखचंदानी ने फिल्म कारोबार के आंकड़े जारी करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी का मुद्दा उठा दिया। नितिन के मुताबिक इसका इंडस्ट्री पर काफी असर होगा बशर्ते फिल्म उद्योग के सारे लोग इसमें मदद करें। उन्होंने विदेशी बाजार में आंकड़ों की पारदर्शिता का उदाहरण भी दिया और उसी तरह का सिस्टम भारत में भी बनाने की वकालत की।

मामला बिगड़ता देख और इसका अपनी साख पर सीधा असर होते देख अभिनेता अक्षय कुमार ने शुक्रवार को अपने घर पर मीडिया दरबार लगाया। अक्षय से यहां हाउसफुल 4 के आंकड़ों को लेकर खूब सवाल हुए। अक्षय पहले तो इन सवालों को लेकर कतराते रहे लेकिन जब इस पर बार बार जोर दिया गया तो उन्होंने कहा, ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं क्या कर सकता हूं? आप थिएटर मालिकों से बात कर सकते हैं। आप मुझसे चार बार सवाल पूछेंगे इसका जवाब पाने के लिए। मेरा उत्तर यही है कि मैं ये सब नहीं लिख रहा हूं।’

फिल्म कारोबार को पिछले तीन दशक से करीब से देखते रहे निर्माता संजय राउतरे दूसरे देशों में आंकड़ों की पारदर्शिता के सवाल पर कहते हैं, ‘चीन में सिनेमा सीधे सरकार के नियंत्रण में हैं। वहां कुल 60 हजार स्क्रीन्स हैं और सरकार को हर सिनेमाघर के कारोबार की सीधी जानकारी होती है। भारत में अभी 10 हजार स्क्रीन्स भी नहीं है। अगर सरकार अभी से इनकी निगरानी शुरू कर दे तो आगे चलकर सबको सहूलियत होगी।’ इस बारे में कुछ स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं से बात की गई तो वे भी बिग बजट की और बड़े बैनर की फिल्मों के आंकड़ों से असंतुष्ट दिखे। इन निर्माताओं ने ही जानकारी दी कि कुछ टिकटिंग ऐप निर्माताओं को कमीशन के आधार पर न्यूनतम कमाई की गारंटी भी देते हैं।