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प्याज की बढ़ी कीमतों से निकल रहे ‘आंसू’, इस वजह से बढ़ रहे हैं दाम

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देशभर के कई राज्यों में प्याज की कीमतें आम जनता के ‘आंसू’ निकाल रही हैं। कई राज्यों में कीमतें 80 से 100 रुपए किलो तक पहुंच गई हैं। आम आदमी के घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाले प्याज की चढ़ी कीमतों ने सरकार को भी चिंता में डाल रखा है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी रोकने की लगातार कोशिश की जा रही है लेकिन अब तक किए गए सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। केंद्र ने तो इसके लिए दूसरे देशों से प्याज की नई खेप भी बुलाई है। प्याज की आवक कम होने के बाद कई राज्यों में इसकी कालाबाजारी होने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित अन्य राज्यों को कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दे डाली है। इस बीच प्याज की कीमतों में आग लगी हुई है।

इस वजह से बढ़ रही प्याज की कीमत

देशभर में इस बार मानसून के दौरान आफत की बारिश हुई है। बड़ी मात्रा में प्याज उत्पादन करने वाले राज्यों कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी भारी बारिश का सामना करना पड़ा है। इस वजह से प्याज की फसल इन राज्यों में बड़ी मात्रा में बर्बाद हुई है। यह प्याज की कमी की सबसे बड़ी वजह बन रही है।

इसके अलावा मानसून में देरी के बाद किसानों द्वारा प्याज की फसल की बोवनी भी देरी से की। इसका परिणाम रहा कि फसल देर से तैयार होने की वजह से मंडियों में पहुंचने में देरी हो रही है।

त्यौहारों के चलते अवैध तरीके से किया स्टॉक

पिछले त्यौहारी सीजन के मद्देनजर व्यापारियों द्वारा अवैध तरीके से प्याज का स्टॉक कर लिया गया था। यह भी मंडियों में प्याज की आवक में कमी आने की बड़ी वजह बना है। देश की राजधानी दिल्ली में कई व्यापारियों द्वारा त्यौहार के पहले बड़ी मात्रा में प्याज को स्टोर किया गया। इस वजह से भी दिल्ली में प्याज की कमी बनी है। अन्य राज्यों में भी अवैध तरीके से प्याज को स्टोर करने की वजह से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा है।

प्याज उत्पादन में आई 50 फीसदी की कमी

मंडियों में प्याज की आवक की कमी की बड़ी वजह यह भी है कि साल 2019 में प्याज के उत्पादन में 50 फीसदी तक की कमी आ गई है। पिछले पांच सालों में यह प्याज का सबसे कम उत्पादन माना जा रहा है।