Home समाचार गोलगप्पों के पानी में पेशाब मिलाने वाला पकड़ा गया लेकिन पुलिस ने...

गोलगप्पों के पानी में पेशाब मिलाने वाला पकड़ा गया लेकिन पुलिस ने जो किया वो आप सोच भी नही सकते?

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

मुंबई के ठाणे के नौपाडा में रहने वाली अंकिता राणे ने अपने घर की खिड़की से वीडियो शूटिंग करके, सामने लगने वाले पानी-बताशे के ठेले वाले को न सिर्फ़ बेनकाब किया, बल्कि उसे पुलिस में देकर अपना नागरिक कर्तव्य भी निभाया।
59 वर्षीय राजदेव लखन चौहान, भास्कर कॉलोनी ठाणे, में नियमित रूप से पानी-बताशे का ठेला लगाता है (था), जिसे पुलिस ने उसी बर्तन में पेशाब करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया, जिस बर्तन से वह ग्राहकों को पानी पिलाता था। बर्तन में पेशाब और पानी पूरी का पानी मिक्स रहता था।

19 वर्षीया अंकिता राणे बताती हैं कि उनके घर के सामने रोज वह व्यक्ति अपना ठेला लगाता था, वह अपनी खिड़की से उसे देखा करती थी। पहले भी मैं अपने दोस्तों को आगाह कर चुकी थी कि, यहाँ पर कुछ भी न खाओ, क्योंकि यह व्यक्ति ठेले पर साफ़-सफ़ाई तो बिलकुल नहीं रखता, बल्कि कान-नाक खुजाते हुए, उसी हाथ से वह ग्राहकों को पानी-पुरी खिलाता था, परन्तु मेरे दोस्त मेरी इन बातों को हँसी में उड़ा देते थे।

परीक्षाएं खत्म होने के बाद फ़ुर्सत में मैंने उस ठेले वाले पर निगाह रखना शुरु किया। मैं यह देखकर हैरान हुई और घृणा से भर उठी कि जिस लोटे से वह पानी-पताशे का मसाला बनाता था और जिस लोटे से कभीकभार ग्राहक पानी भी पी लिया करते थे, वह उसी लोटे में पेशाब भी करता है। जब यह बात मैंने अपने मित्रों, परिवारवालों एवं बिल्डिंग निवासियों को बताई तो किसी ने भी इस पर विश्वास नहीं किया, तब मैंने इसकी यह घृणित हरकत कैमरे में कैद करने का फ़ैसला किया।

वीडियो को देखने के बाद ही स्थानीय निवासियों ने पहले तो उस पानीपुरी ठेले वाले की चकाचक धुलाई की और फ़िर उसे पुलिस थाने ले गये, जहाँ उसके खिलाफ़ केस दर्ज किया गया। ठेले वाले चौहान की सफ़ाई भी बड़ी मासूमियत भरी थी, जिसका कोई जवाब न तो पुलिस के पास था और न ही महानगरपालिका के अधिकारियों के पास, उसने कहा, यहाँ आसपास आधा किमी तक एक भी सार्वजनिक मूत्रालय नहीं है, मैं अपने ठेले को लावारिस छोड़कर इतनी दूर बार-बार पेशाब करने कैसे जा सकता हूं। चूंकि यह कालोनी साफ़-सफ़ाई में अव्वल है और यहाँ की गलियों में भी लगातार भीड़ की आवाजाही बनी रहती है, तो मैं पेशाब कहाँ करूँ?

थाना प्रभारी हेमन्त सावन्त ने भी इस बात की पुष्टि की, कि इस इलाके में आसपास कोई भी सार्वजनिक मूत्रालय नहीं है, पहले एक-दो थे भी, लेकिन वह भी अतिक्रमण और बिल्डरों के अंधे लालच में स्वाहा हो गए। पुलिस के सामने समस्या यह थी कि आखिर उस ठेले वाले को किस धारा के तहत केस बनाया जाए, फ़िलहाल उन्होंने मुम्बई पुलिस एक्ट के सार्वजनिक स्थल पर पेशाब करने के तहत 1200 रुपये जुर्माना और चेतावनी लगाकर छोड़ दिया है। जिस तरह दिल्ली के लाखों कामकाजी लोग सस्ते छोले-भटूरे पर गुज़ारा करते हैं, उसी तरह मुम्बई में भी लोग अपना पेट भरने के लिये वड़ा-पाव और पाव-भाजी पर निर्भर रहते हैं, परन्तु यह घटना सामने आने के बाद कहना मुश्किल है कि लोग अब क्या करेंगे?