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किसी ने घरों में झाडू-पोंछा लगाकर तो किसी ने भीख मांगकर बिताई है जिंदगी, अब खाकी के लिए कर रहे खुद को तैयार…

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छत्तीसगढ़ में इन दिनों पुलिस भर्ती के लिए फिजिकल टेस्ट हो रहे हैं। यह पहला मौका है जब राज्य की पुलिस में किन्नरों के लिए भी भर्ती के दरवाजे खुले हैं। साल 2018 में इस परीक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के किन्नरों ने लिखित परीक्षा दिलाई और अब शारीरिक परीक्षा में भी अपना दम दिखा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा जारी शेड‌्यूल के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा 28 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगी। तृतीय लिंग समुदाय के उम्मीदवारों को ट्रेनिंग देने के लिए रायपुर एसएसपी अजय यादव ने एक कोच की सुविधा दी। पिछले कुछ दिनों यह सभी पुलिस ग्राउंड में तैयारी में जुटे थे।

किन्नर समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाली विद्या ने बताया कि अब इन्हें लेकर लोगों का नजरिया बदलेगा।

किन्नर समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाली विद्या ने बताया कि अब इन्हें लेकर लोगों का नजरिया बदलेगा।

इस समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले विद्या ने बताया कि पिछले तीन सालों में इस नौकरी की आस में हमारे समुदाय के लोगों की जिंदगी बदली है। जिन्होंने कभी स्पोर्ट्स ग्राउंड नहीं देखा वो वहां पुलिस ट्रेनिंग कर रहे हैं। भर्ती में शामिल होने वाले साथी थका देने वाली प्रैक्टिस में अपना पसीना बहा रहे है। उनके मन में बस एक ही आस है, कि हमें भी सामान्य समझा जाए और काम में सम्मान मिले। मगर यहां तक का सफर आसान नहीं रहा। पढ़िए किन मुश्किलों में बीतता है एक किन्नर का जीवन, जीसे देखकर अक्सर सभ्य समाज हंसी उड़ा देता है।

हाइवे पर भीख मांगकर किया गुजारा, मगर हिम्मत नहीं हारी

नैना चाहती हैं कि वो जिंदगी में कामयाब बनें और उनके जैसे दूसरे लोगों की मदद करें

नैना चाहती हैं कि वो जिंदगी में कामयाब बनें और उनके जैसे दूसरे लोगों की मदद करें

रायपुर की नैना कपड़ों की दुकान में काम करती थी। 4 साल पहले इसे घर वालों ने घर से निकाल दिया था। फिर अपने कुछ किन्नर दोस्तों के साथ ही नैना रह रही थी। लॉकडाउन में नौकरी चली गई। नैना के पास दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो गई। अचानक बीमार भी पड़ी तो इलाज के लिए रुपए नहीं थी। मजबूरी में हाइवे पर भीख मांगकर रुपए जमा करना शुरू किया। इन पैसों से कुछ दिन गुजारा चलाया। हिम्मत न हारते हुए नैना अब पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटी हैं। रनिंग, ऊंची कूद, गोला फेक जैसी प्रतियोगिता में खुद को बेस्ट बनाने के मिशन पर काम कर रही हैं।

जिंदा हूं या नहीं ये जानने के लिए घर वाले कॉल करते हैं

तनुश्री का मनना है कि दूसरे सरकारी महकमों में भी हमें मौका मिलना चाहिए।

तनुश्री का मनना है कि दूसरे सरकारी महकमों में भी हमें मौका मिलना चाहिए।

रायपुर की तनुश्री ने बताया कि स्कूल में जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, शरीर में बदलाव महसूस हो रहे थे। मगर दोस्तों या घर वालों के सामने मैंने कभी यह नहीं दिखाया कि मैं अलग हूं। डर की वजह से मैं एक लड़के की तरह रहती थी। मगर यह बात नहीं छुपाई जा सकती थी। 12वीं क्लास तक 4 स्कूल बदलने पड़े क्योंकि सभी मुझे परेशान करते थे। घर वालों ने भी साथ छोड़ दिया। कई बार वो बाहर मिलते हैं तो पहचानने से इंकार कर देते हैं। हां फोन जरूर करते हैं कभी-कभी ये देखने के लिए कि मैं जिंदा हूं भी या नहीं। मगर मैं खुद को बेहतर बनाने में जुटी हुई हूं। मुझे पुलिस भर्ती से उम्मीद है कि हमारे प्रति समाज का नजरिया बदलेगा ।

घरों में किया झाड़ू-पोछे का काम- मेरे हाथ से पानी नहीं लेते थे लोग

शिवन्या ने बताया कि उसके पिता का कुछ दिन पहले निधन हो गया, मगर मैंने पुलिस भर्ती के लिए तैयारी जारी रखी।

शिवन्या ने बताया कि उसके पिता का कुछ दिन पहले निधन हो गया, मगर मैंने पुलिस भर्ती के लिए तैयारी जारी रखी।

रायपुर की शिवन्या ने बताया कि पूरा बचपन मामू- किन्नर इस तरह के शब्दों को सुनकर ही बीता। बस मुझे देखकर लोग हंसते रहते थे, चिढ़ाया करते थे। कभी लगता था कि क्या मेरे कोई सींग हैं जो मेरे साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है। हमारे परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी। मैं मां के साथ घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती थी। मुझे याद है मैं जहां काम करती थी जब वहां कोई मेहमान आता तो मेरे हाथ से वो लोग पानी नहीं लेते थे। मुझे ऊपर से नीचे घूरा जाता था। आपस में महिलाएं फुसफुसा कर नीच भाव से देखा करती थीं। इस माहौल में मैंने स्कूली पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में आई तो लड़कों अपने मजे के लिए मुझे टॉयलेट में बंद कर दिया था। बीए की पढ़ाई करते हुए यही सपना था कि कुछ बनना है। पुलिस भर्ती से इस सपने को पूरा करने की कोशिश कर रही हूं।

सुसाइड करने की सोची, मगर अब जिद है कुछ बन के दिखाउंगी

दीप्शा ने बताया कि वो हार्मोंस ट्रीटमेंंट ले रही हैं, खुद को एक फीमेल में पूरी तरह बदलने के लिए।

दीप्शा ने बताया कि वो हार्मोंस ट्रीटमेंंट ले रही हैं, खुद को एक फीमेल में पूरी तरह बदलने के लिए।

रायपुर की दीप्शा लाखे नगर में रहती हैं। दीप्शा ने बताया कि स्कूल के दौरान मुहल्ले में मुझे लड़के चिढ़ाया करते थे। जब मैंने इसका विरोध किया तो मुझे एक लड़के ने चाकू मार दिया था। उस दिन लगा कि मेरा इस स्वरूप में जन्म ही क्यों हुआ। महिलाएं भी मुझे कई तरह की बातें सुनाती थीं। मुझे डांस का शौक रहा है। जब मैं लड़कियों की तरह डांस करती थी तो मेरा मजाक बनाया जाता था। एक बार मेरे स्कूल टीचर ने ही मेरा मजाक उड़ाया। क्लास में हुई इस बदसलूकी को मैं सह नहीं पाई। कुछ साल पहले इसी तरह की बातों से परेशान होकर मैंने जहर खा लिया था। तब सामाजिक कार्यकर्ता विद्या जी ने मेरी जान बचाई। मगर अब मैंने खुद को बदला है। अब मेरी जिद है कि मैं कुछ बनकर दिखाउंगी। इसी वजह से पुलिस भर्ती तैयारी में जुटी हूं।