Home छत्तीसगढ़ कोरिया पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का...

कोरिया पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

कोरिया पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण पर काबू पाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार के निर्देशानुसार, 23 जुलाई 2024 को रक्षित केंद्र बैकुंठपुर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों में ध्वनि स्तर को नियंत्रित कर नागरिकों को शांत और स्वास्थ्यप्रद वातावरण प्रदान करना था। कोरिया पुलिस द्वारा वर्ष 2024 में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण हेतु प्रेशर हार्न के तहत 303 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही कर 1,04,500 रू. समन शुल्क वसुल की गई है, वहीं कोलाहल अधिनियम के तहत 04 प्रकरणो में साउंड बॉक्स, DJ की जप्ती की गई है।

जनता की सेवा और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण हेतु एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कोरिया पुलिस ने मिश्रित प्रवर्गों के क्षेत्र व परिक्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों में ध्वनि का समय भारित औसत स्तर माप कर कार्यवाही में अमल लाने हेतु एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया है। रक्षित केन्द्र बैकुंठपुर के कान्फ्रेंस हॉल में रक्षित निरीक्षक श्री नितिश आर० नायर व प्र०आर 345 रामस्वरूप मार्को के द्वारा उक्त प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमे जिले के सभी थाना, चौकी एवं रक्षित केंद्र के कर्मचारीगण उपस्थित हुए।

उक्त प्रशिक्षण में ध्वनि माप उपकरणों का सही उपयोग, ध्वनि स्तरों का विश्लेषण, और मापदंडों के अनुसार उचित कार्यवाही करने की जानकारी प्रदान किया गया है

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 धारा 15 के तहत ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है, इस अधिनियम के तहत किसी भी निजी या सार्वजनिक कार्यक्रम में लाउड स्पीकर, डेक, डीजे, बैंड-बाजा व अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता है। इसी तरह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत 80 डेसिबल से अधिक ध्वनि नहीं होनी चाहिए।

रक्षित केंद्र में हुए इस प्रशिक्षण में प्र०आर० 324 प्रेमलाल टोप्पो, प्र०आर० 259 मुखदेग सिंह, आर० 405 जगनारायण, आर0 418 कन्हैया राजवाडे, आर० 232 सुरेन्द्र सिंह, आर० 20 विवेक तिवारी, आर० 660 सुखदेव, आर0 547 अजय कुजूर, आर0 523 गुलशन, आर0 443 वेदप्रकाश, आर० 396 विजय बहादूर, आर0 500 सम्मेलाल कोशले, आर० 509 रोशन एक्का, आर० 109 एलियाजर तिर्की एवं आर0 499 पंकज तिवारी ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।